कोयला खदान की जद में पेयजल ढांचा: हटने की कगार पर बोरवेल, ओवरहेड टैंक और पाइपलाइन नगर पंचायत और जनपद पंचायत की NOC में बड़ा खुलासा: मुआवजे के भुगतान के बाद हटाई जाएगी पीने के पानी की पूरी व्यवस्था
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धरमजयगढ़ – कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KPCL) द्वारा धरमजयगढ़ क्षेत्र के दुर्गापुर-II/तराईमार एवं दुर्गापुर-II/सरिया कोयला ब्लॉक में खनन कार्य शुरू करने की तैयारियों के बीच एक बड़ा मामला सामने आया है। खदान क्षेत्र में आने वाली पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह से विस्थापित और ध्वस्त किए जाने की योजना है। नगर पंचायत और जनपद पंचायत धरमजयगढ़ द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) में यह बात पूरी तरह साफ हो गई है कि कोयला खदान की शुरुआत से पहले प्रभावित क्षेत्रों में स्थित बोरवेल, ओवरहेड टैंक और जलापूर्ति की पाइपलाइनों को हटा दिया जाएगा।

खदान प्रभावित 7 प्रमुख क्षेत्रों में हटेगा जलापूर्ति ढांचा
KPCL के मुख्य इंजीनियर (माइंस) द्वारा दिए गए आवेदन पर नगर पंचायत धरमजयगढ़ और जनपद पंचायत धरमजयगढ़ की ओर से जारी NOC में यह स्पष्ट उल्लेख है कि खदान सीमा में पेयजल आपूर्ति के जितने भी संसाधन मौजूद हैं, उन्हें हटाया जाना तय है। इस फैसले से धरमजयगढ़, धरमजयगढ़ कॉलोनी, तराईमार, मेंढरमार, बायसी, बायसी कॉलोनी और रुपूंगा जैसे कुल 7 क्षेत्र सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।

मुआवजे के भुगतान के बाद विस्थापित होंगे बोरवेल और ओवरहेड टैंक
स्थानीय निकायों द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण-पत्र के अनुसार खनन कार्य प्रारंभ करने से पूर्व कंपनी द्वारा प्रचलित नियमों के तहत निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान किया जाएगा। मुआवजा मिलने के पश्चात ही वर्तमान में संचालित बोरवेल, पानी की टंकियों (ओवरहेड टैंक) तथा बिछाई गई जलापूर्ति पाइपलाइनों को मौके से हटाया जाएगा।
अनापत्ति में मुख्य जलापूर्ति पाइपलाइन से इनकार
प्रशासनिक पत्राचार और अनापत्ति प्रमाण-पत्र में यह दावा किया गया है कि प्रभावित ग्रामों और नगर पंचायत सीमा में मुख्य जलस्रोत से संचालित कोई भी स्थायी मुख्य पाइपलाइन नहीं गुजरती है। केवल स्थानीय स्तर पर पानी की सप्लाई के लिए बिछाए गए बोरवेल, ओवरहेड टैंक और पाइपलाइनें ही खदान सीमा के भीतर हैं, जिन्हें खनन से पहले जमींदोज या स्थानांतरित किया जाना है।
हाई टेंशन बिज़ली लाइन का भी तैयार हुआ पंचनामा
पेयजल ढांचे को हटाने के साथ-साथ क्षेत्र से गुजरने वाली 400 के.वी. सीपत-रांची हाई टेंशन (HT) पावर लाइन का भी राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा निरीक्षण कर पंचनामा तैयार कर लिया गया है। इसमें धरमजयगढ़, मेंढरमार और बायसी क्षेत्र के विभिन्न खसरों से गुजरने वाली सैकड़ों मीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन की नापजोख पूरी की गई है।
जनता के सामने पानी का संकट
कोयला खनन की राह आसान करने के लिए बोरवेल, पानी की टंकियों और पाइपलाइनों को हटाने पर सहमति तो दे दी गई है, लेकिन इसके बाद प्रभावित इलाकों और नगर पंचायत के निवासियों को पीने का पानी कहाँ से और किस व्यवस्था से मिलेगा, इस पर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
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