करीब साढ़े सात किलोमीटर के नए मार्ग के लिए भेजा वन स्वीकृति प्रस्ताव, 2,830 पेड़ और 165 परिवार होंगे प्रभावित , 23.214 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की अनुमति का प्रस्ताव
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धरमजयगढ़ – रायपुर–धनबाद आर्थिक गलियारे के तहत निर्माणाधीन उरगा–पथलगांव खंड के राष्ट्रीय राजमार्ग-130 ए के पुनर्संरेखण की प्रक्रिया अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने प्रस्तावित नए मार्ग के लिए 23.214 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की अनुमति हेतु आधिकारिक प्रस्ताव भेजा है। यह प्रस्ताव वर्तमान में परियोजना जांच समिति- I के सदस्य सचिव के स्तर पर समीक्षा की प्रक्रिया में है।

दरअसल, संबंधित हिस्से का मूल सड़क मार्ग बाद में आवंटित किए गए कोयला ब्लॉकों के कारण विवाद में आ गया था। कर्नाटक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को दुर्गापुर-द्वितीय/सरिया, दुर्गापुर-द्वितीय/ताराईमार और शेरबंद कोयला ब्लॉक आवंटित होने के बाद मूल सड़क मार्ग और खनन क्षेत्र के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई। इसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, कोयला मंत्रालय, केंद्रीय खान योजना एवं डिजाइन संस्थान तथा कर्नाटक पावर कॉरपोरेशन के बीच उच्चस्तरीय विचार-विमर्श हुआ।

कोयला खदानों की साझा सीमा से निकलेगा नया मार्ग
31 जनवरी 2024 को कोयला सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में सड़क को तीनों आवंटित कोयला ब्लॉकों की साझा सीमाओं के अनुरूप ले जाने पर सहमति बनी। इसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने नया संरेखण तैयार किया। 9 अप्रैल 2025 की बैठक में प्रस्तुत अंतिम संरेखण को संबंधित पक्षों ने स्वीकार किया। तकनीकी परीक्षण में मौजूदा उच्चदाब विद्युत लाइन को स्थानांतरित करने से बचने के लिए केवल मामूली ज्यामितीय सुधार किया गया।
अंतिम दस्तावेज के अनुसार यह पुनर्संरेखण डिजाइन किलोमीटर 114+450 से किलोमीटर 121+410 के बीच है और इसकी डिजाइन लंबाई 7.510 किलोमीटर बताई गई है। इसी मार्ग के लिए 23.214 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की आवश्यकता सामने आई है।

336.95 करोड़ रुपये का विकल्प, 165 परिवार होंगे प्रभावित होंगे 2830 पेड़!
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की तुलनात्मक रिपोर्ट में तीन विकल्पों का परीक्षण किया गया है। इसमें प्रस्तावित विकल्प-एक की अनुमानित लागत 336.95 करोड़ रुपये है। इसके मुकाबले विकल्प-दो की लागत 642.828 करोड़ रुपये और विकल्प-तीन की 1,320.663 करोड़ रुपये आंकी गई है। वन भूमि का प्रभाव भी विकल्प-एक में 23.214 हेक्टेयर है, जबकि विकल्प-दो में 48.959 हेक्टेयर और विकल्प-तीन में 100.583 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होने का आकलन है।
पेड़ों पर प्रभाव की दृष्टि से विकल्प-एक में 2,830 पेड़ों के प्रभावित होने का अनुमान है। वहीं विकल्प-दो में 5,399 और विकल्प-तीन में 11,092 पेड़ों का आंकड़ा दिया गया है। सामाजिक प्रभाव के लिहाज से विकल्प-एक में 165 परिवार प्रभावित होने का स्पष्ट उल्लेख है। यानी नया मार्ग भले ही अन्य विकल्पों की तुलना में कम लागत और कम वन क्षेत्र वाला है, लेकिन इससे भी 165 परिवार प्रभावित होंगे।
हालांकि इन परिवारों को सीधे तौर पर “विस्थापित परिवार” नहीं कहा गया है। आधिकारिक तालिका में इन्हें “प्रभावित परिवार” के रूप में दर्ज किया गया है। विकल्प-तीन में मूल संरेखण को बनाए रखने पर सड़क का सीधा टकराव कर्नाटक पावर कॉरपोरेशन के सक्रिय खनन पट्टे से होता था। इसलिए इसे व्यवहारिक विकल्प नहीं माना गया। दूसरी ओर विकल्प-दो में सभी कोयला ब्लॉकों से दूरी बनाते हुए लंबा मार्ग तैयार करना पड़ता, जिससे भूमि अधिग्रहण, वन भूमि, लागत और निर्माण अवधि में काफी वृद्धि होती।

इसी आधार पर कोयला ब्लॉकों की साझा सीमा के अनुरूप तैयार विकल्प-एक को सबसे उपयुक्त और सर्वोत्तम विकल्प माना गया। दस्तावेज में इस संरेखण को केंद्रीय खान योजना एवं डिजाइन संस्थान तथा कर्नाटक पावर कॉरपोरेशन की तकनीकी सहमति प्राप्त होने की बात भी दर्ज है।
अब वन स्वीकृति पर टिकी परियोजना की अगली राह
पुनर्संरेखण का विकल्प तय होने के बावजूद परियोजना के इस हिस्से के लिए वन भूमि के उपयोग की वैधानिक स्वीकृति महत्वपूर्ण अगला चरण है। 23.214 हेक्टेयर वन भूमि के प्रस्ताव पर परियोजना जांच समिति- I की समीक्षा और उसके बाद आवश्यक स्वीकृतियां मिलने पर आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी।

कुल मिलाकर, भारतमाला का यह पुनर्संरेखण महज तकनीकी बदलाव नहीं है। मूल सड़क मार्ग और कोयला खदानों के बीच पैदा हुए टकराव ने करीब साढ़े सात किलोमीटर के पूरे संरेखण को बदल दिया। नया विकल्प लागत, वन भूमि और पेड़ों के प्रभाव के लिहाज से सबसे कम वाला चुना गया है, लेकिन इसके साथ 23.214 हेक्टेयर वन भूमि, 2,830 पेड़ों और 165 परिवारों पर पड़ने वाला प्रभाव अब वन स्वीकृति प्रक्रिया के केंद्र में रहेगा।
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