October 20, 2026

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शासकीय जमीन विवाद में राजू यादव को बड़ी राहत, अपर सत्र न्यायालय ने दी अग्रिम जमानत

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1.312 हेक्टेयर भूमि के नामांतरण और क्रय-विक्रय को लेकर दर्ज था अपराध, बचाव पक्ष ने पुराने राजस्व रिकॉर्ड और एफआईआर की तारीख के बीच अंतर को रखा अदालत के सामने

धरमजयगढ़ – शासकीय भूमि के नामांतरण और उसके कथित तौर पर निजी नाम पर दर्ज होने के बाद क्रय-विक्रय से जुड़े मामले में आरोपी राजू कुमार यादव को अपर सत्र न्यायालय घरघोड़ा से बड़ी राहत मिली है। अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद राजू कुमार यादव (अमलीटिकरा )की प्रथम अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत के आदेश के बाद आरोपी को गिरफ्तारी की स्थिति में अग्रिम राहत प्राप्त हो गई है।


मामला धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम अमलीटीकरा से जुड़ा है, जहां करीब 1.312 हेक्टेयर भूमि के नामांतरण और बाद में उसके विक्रय को लेकर विवाद सामने आया। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है। अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि संबंधित भूमि शासकीय प्रकृति की थी और उसे गलत तरीके से निजी व्यक्ति के नाम दर्ज कराए जाने के बाद 17 जनवरी 2025 को राजू यादव के पक्ष में विक्रय किया गया।
पुराने राजस्व अभिलेखों को बचाव पक्ष ने बनाया अहम आधार
अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुशील शुक्ला ने पुराने राजस्व दस्तावेजों को अदालत के समक्ष रखा। बचाव पक्ष ने वर्ष 1930 की मिसल तथा 1954-55 के अधिकार अभिलेख सहित अन्य उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए तर्क दिया कि संबंधित भूमि लंबे समय से निजी खातेदारों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज रही है।
बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया कि यदि संबंधित भूमि शासकीय प्रकृति की थी, तो पुराने राजस्व अभिलेखों में उसका निजी खातेदारों के नाम दर्ज होना मामले की परिस्थितियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि राजू यादव ने उपलब्ध दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि का क्रय किया तथा उन्हें किसी कथित अनियमितता की जानकारी नहीं थी।
एफआईआर की तारीख को लेकर बचाव पक्ष ने रखी अपनी दलील
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने एफआईआर दर्ज होने की तारीख और भूमि के बैनामे के बीच के अंतराल को भी अदालत के समक्ष रखा। बचाव पक्ष के अनुसार, संबंधित भूमि का बैनामा 17 जनवरी 2025 को हुआ था, जबकि इस संबंध में एफआईआर 24 अगस्त 2026 को दर्ज की गई।
बचाव पक्ष ने इस अंतराल को मामले की परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताते हुए अदालत का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया। हालांकि, एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी के कारणों या उसके कानूनी प्रभाव को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष के बजाय यह पहलू अदालत के समक्ष रखी गई दलीलों का हिस्सा है। इसका अंतिम निर्धारण जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में होना है।
बचाव पक्ष ने इसके साथ ही वर्ष 2001-02 के राजस्व दस्तावेजों का भी हवाला देते हुए कहा कि संबंधित भूमि उस अवधि के अभिलेखों में भी विक्रेता के नाम दर्ज रही है। बचाव पक्ष के अनुसार, इन दस्तावेजों से भूमि की पूर्व राजस्व स्थिति को समझने में मदद मिलती है।
दस्तावेजी प्रकृति के मामले को भी रखा गया सामने
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से मामले की प्रकृति को मुख्यतः दस्तावेजों और राजस्व अभिलेखों से जुड़ा बताया गया। अदालत ने उपलब्ध सामग्री और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत की राहत प्रदान की।
अदालत ने ₹50,000 के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा ₹25-25 हजार के दो जमानतदारों की शर्त पर गिरफ्तारी की स्थिति में अग्रिम जमानत प्रदान की।
गौरतलब है कि अग्रिम जमानत गिरफ्तारी से पूर्व दी जाने वाली न्यायिक राहत है। इससे मामले के आरोपों का अंतिम रूप से निराकरण या आरोपी को दोषमुक्त किया जाना नहीं माना जाता। मामले के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय आगे की जांच और न्यायिक कार्यवाही में होगा।


राजू यादव बोले— आरोप बेबुनियाद, कानून पर पूरा भरोसा
अग्रिम जमानत मिलने के बाद राजू कुमार यादव ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित भूमि का क्रय उपलब्ध दस्तावेजों और वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर किया है।
राजू यादव ने कहा कि जिस भूमि को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसके पुराने राजस्व अभिलेखों में निजी खातेदारों के नाम दर्ज होने की स्थिति सामने आती है। उनका कहना है कि भूमि खरीदने से पहले उन्होंने उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित प्रक्रिया का पालन किया था तथा उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि भविष्य में भूमि की प्रकृति को लेकर आपराधिक विवाद उत्पन्न होगा।
उन्होंने कहा, “मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। मैंने पूरी वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए भूमि खरीदी है। पुराने राजस्व अभिलेखों में भी भूमि की स्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज है। मुझे न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और मुझे विश्वास है कि जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया में वास्तविक तथ्य सामने आएंगे। सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता।”
अब राजस्व रिकॉर्ड और नामांतरण प्रक्रिया की जांच अहम
अग्रिम जमानत के बाद मामले में आगे होने वाली जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच के दौरान संबंधित भूमि की वास्तविक प्रकृति, पुराने राजस्व अभिलेखों में दर्ज स्थिति, नामांतरण की प्रक्रिया, विक्रय के समय उपलब्ध दस्तावेज तथा संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई जैसे पहलुओं की जांच की जा सकती है।
एक ओर अभियोजन पक्ष का आरोप है कि शासकीय भूमि को गलत तरीके से निजी नाम पर दर्ज कराकर उसका विक्रय किया गया, वहीं बचाव पक्ष पुराने राजस्व अभिलेखों के आधार पर भूमि के लंबे समय से निजी खातेदारों के नाम दर्ज होने का दावा कर रहा है।
ऐसे में मामले की वास्तविक तस्वीर संबंधित मूल राजस्व अभिलेखों, नामांतरण प्रक्रिया और भूमि की वास्तविक प्रकृति की जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल अपर सत्र न्यायालय के आदेश से राजू कुमार यादव को गिरफ्तारी से राहत मिल गई है। अब मामले में आगे होने वाली जांच और न्यायिक कार्यवाही पर निगाहें टिकी हैं।

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