एकेएस विश्वविद्यालय में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का दीक्षारंभ, इंडक्शन में अनुसंधान से उद्यमिता तक की दी सीख
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सतना। एकेएस विश्वविद्यालय के लाइफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी एवं एनवायरनमेंटल साइंस संकाय के प्रथम वर्ष के नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिए सोमवार को सेंट्रल हॉल सभागार में दीक्षारंभ संस्कार एवं इंडक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, अनुशासन, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और करियर की संभावनाओं से परिचित कराना रहा। इंडक्शन के दौरान विद्यार्थियों को यह समझाने पर जोर दिया गया कि उच्च शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नई सोच, प्रयोग, कौशल और समाज की समस्याओं के समाधान से जुड़ने का माध्यम भी है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एकेएस विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बीए चोपाड़े और आईआईटी बीएचयू, वाराणसी के स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ. विशाल मिश्रा रहे। कार्यक्रम की शुरुआत नवप्रवेशी विद्यार्थियों को किट प्रदान कर पंजीयन प्रक्रिया से हुई। यह कार्य धीरेंद्र मिश्रा एवं नंदिनी शर्मा ने किया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना और कुलगीत के साथ दीक्षारंभ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ हुआ। मंच संचालन बायोटेक्नोलॉजी विभाग की प्राध्यापक डॉ. माही चौरे ने किया।
अनुसंधान और उद्यमिता को बताया भविष्य की राह
कुलपति प्रोफेसर बीए चोपड़े ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ नए विचारों पर काम करने और उन्हें उपयोगी नवाचार में बदलने के लिए प्रेरित किया। वहीं, विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति डेवलपमेंट प्रोफेसर हर्षवर्धन ने विद्यार्थी जीवन में अनुशासन की भूमिका पर जोर दिया।
विधिक सलाहकार डॉ. सूर्यनाथ सिंह गहरवार ने विद्यार्थी जीवन के मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को जिम्मेदारी, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की सीख दी।
डीन प्रोफेसर कमलेश चौरे ने नई पीढ़ी को नई सोच के साथ विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जैवप्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व, नवीन अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्किल प्रोग्राम की संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जैवप्रौद्योगिकी का उपयोग सामाजिक एवं प्राकृतिक समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विद्यार्थियों को विषय के व्यावहारिक पक्ष और बदलते तकनीकी दौर के अनुरूप स्वयं को तैयार करने के लिए प्रेरित किया गया।
आईआईटी बीएचयू, वाराणसी के स्कूल ऑफ बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ. विशाल मिश्रा ने विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रस्तुति दी। उन्होंने बायोप्रोसेस इंजीनियरिंग, मेटाबोलिक इंजीनियरिंग और बायोरिएक्टर डिजाइन के महत्व को समझाया। साथ ही इन क्षेत्रों में उच्च शिक्षा, अनुसंधान और करियर के अवसरों की जानकारी दी। इंडक्शन सत्र में विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि जैवप्रौद्योगिकी जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में प्रयोगशाला आधारित ज्ञान के साथ तकनीकी दक्षता और समस्या समाधान की क्षमता भी आवश्यक है। दीक्षारंभ कार्यक्रम में डॉ महेंद्र तिवारी, छात्र कल्याण अधिष्ठता, ने अपने वक्तव्य में विश्वविद्यालय के विभिन्न नीतियों से नवीन विद्यार्थियों को अवगत कराया। कार्यक्रम के अंत में बायोटेक्नोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. अश्विनी ए वाऊ ने धन्यवाद ज्ञापित किया और नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को आगे की शैक्षणिक यात्रा के लिए मार्गदर्शन दिया।
दीक्षारंभ के समापन अवसर पर सांस्कृतिक निदेशालय की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम डॉ. दीपक मिश्रा के निर्देशन में हुआ। प्रथम दिन के दीक्षारंभ एवं इंडक्शन कार्यक्रम का समन्वय प्रोफेसर असिस्टेंट प्रोफेसर पारस कोशे एवं सुमन पटेल ने किया। डॉ. कीर्ति समदरिया, डॉ. मोनिका सोनी, डॉ. विवेक कुमार अग्निहोत्री, डॉ. सौरभ सिंह गौर, डॉ. शिल्पी सिंह, डॉ. मनी शंकर पांडे, डॉ. परमार केशरी नंदन, अर्पित श्रीवास्तव, शैली मिश्रा, नितिन सिंह परिहार, श्रेष्ठ राज द्विवेदी, प्रतिमा मिश्रा, डॉ. प्रभात सिंह चौहान ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के माध्यम से नवप्रवेशी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत से ही अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास, अनुशासन और करियर-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया गया।
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