एक्सक्लूसिव रिपोर्टसूर्या एग्रीसाइंसेज के बीज कारोबार पर उठे गंभीर सवाल, लाइसेंस और बीज गुणवत्ता को लेकर जांच की मांग
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किसानों की मेहनत और उनकी पूरी उम्मीद खेत में बोए गए बीज से जुड़ी होती है। ऐसे में यदि बीज की गुणवत्ता, लाइसेंस और उसके परीक्षण को लेकर सवाल उठें, तो मामला बेहद गंभीर हो जाता है। जशपुर जिले में लखनऊ की कंपनी M/s Surya Agrisciences Pvt. Ltd. के बीज कारोबार को लेकर ऐसे ही कई सवाल सामने आए हैं।
उपलब्ध दस्तावेजों और एक किसान की शिकायत के आधार पर कंपनी के बीज कारोबार से जुड़े लाइसेंस, अलग-अलग पते, बीज की गुणवत्ता तथा विभागीय जांच की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित विभाग की जांच और अधिकृत दस्तावेजों से होना बाकी है।
लाइसेंस की वैधता पर बड़ा सवाल
उपलब्ध दस्तावेज में Seed Dealer Licence No. 195 की वैधता 31 अगस्त 2025 तक दर्ज दिखाई देती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसके बाद इस लाइसेंस का विधिवत नवीनीकरण हुआ था या नहीं?
यदि लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हुआ था, तो 31 अगस्त 2025 के बाद कंपनी के बीजों का कारोबार किस वैध अनुमति के आधार पर संचालित हुआ—यह जांच का विषय है।
संबंधित विभाग से यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि कंपनी के पास वर्तमान में कौन-कौन से वैध लाइसेंस और अनुमतियां हैं तथा उनकी वैधता अवधि क्या है।
अलग-अलग पतों ने बढ़ाई उलझन
कंपनी से जुड़े दस्तावेजों और पैकेटों पर लखनऊ के इंदिरा नगर, पत्थलगांव की पुरानी बस्ती और रायपुर के अटारी क्षेत्र से जुड़े पते सामने आने की बात कही जा रही है।
अब सवाल यह है कि कंपनी का वास्तविक कार्यालय, भंडारण केंद्र, पैकिंग सेंटर अथवा अन्य संबंधित गतिविधियां किन स्थानों पर संचालित होती हैं?
क्या इन सभी स्थानों का कृषि विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन किया गया है?
यदि निरीक्षण हुआ है तो उसकी रिपोर्ट क्या कहती है? और यदि निरीक्षण नहीं हुआ, तो बिना भौतिक सत्यापन के संबंधित गतिविधियों को अनुमति कैसे मिली?
किसान ने लगाया बीज खराब होने का आरोप
इस मामले में जशपुर जिले के एक किसान की शिकायत भी सामने आई है। किसान का आरोप है कि सूर्या एग्रीसाइंसेज का बीज बोने के बाद अपेक्षित अंकुरण नहीं हुआ, जिसके कारण उसकी फसल प्रभावित हुई और उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
किसान की शिकायत की स्वतंत्र रूप से जांच किया जाना जरूरी है।
जांच में यह देखा जाना चाहिए कि किसान को बेचे गए बीज का Lot Number क्या था, उसका सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं, उस लॉट की गुणवत्ता जांच कब और कहां हुई तथा Germination और Physical Purity के परीक्षण में क्या परिणाम आए थे।
यदि संबंधित बीज का सरकारी स्तर पर परीक्षण हुआ था तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए।
KVK/ICAR परीक्षण रिपोर्ट पर भी सवाल
मामले में कथित तौर पर KVK/ICAR से जुड़ी परीक्षण रिपोर्ट का भी उल्लेख किया जा रहा है। इसलिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि वास्तव में कौन-सी संस्था ने, किस बीज अथवा किस लॉट का परीक्षण किया था और परीक्षण की रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष दर्ज किया गया था।
किसान और आम लोगों के सामने यह तथ्य आना जरूरी है कि बाजार में बिक्री से पहले संबंधित बीज ने निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा किया था या नहीं।
RTI से मांगी गई जानकारी
मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए सूचना के अधिकार के माध्यम से विभाग से कई बिंदुओं पर जानकारी मांगे जाने की बात सामने आई है।
इनमें लाइसेंस की वर्तमान स्थिति, उसके नवीनीकरण से संबंधित दस्तावेज, बीजों की सैंपलिंग, लैब टेस्टिंग रिपोर्ट, संबंधित लॉट की गुणवत्ता जांच तथा कथित KVK/ICAR परीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड शामिल बताए जा रहे हैं।
अब आरटीआई के जवाब से यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित विभाग के रिकॉर्ड में कंपनी के लाइसेंस और बीजों की गुणवत्ता को लेकर क्या स्थिति दर्ज है।
जिम्मेदार विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग
बीज की गुणवत्ता से जुड़ा मामला सीधे किसान की आजीविका से जुड़ा होता है। इसलिए यदि किसी किसान को घटिया या मानक के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले बीज के कारण नुकसान हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है।
वहीं यदि कंपनी के खिलाफ लगाए गए आरोप दस्तावेजी जांच में सही नहीं पाए जाते हैं, तो कंपनी का पक्ष भी उसी स्पष्टता के साथ सामने आना चाहिए।
फिलहाल पूरे मामले में सबसे जरूरी सवाल यही है—लाइसेंस की वास्तविक स्थिति क्या है, किसान को बेचे गए बीज की गुणवत्ता क्या थी और विभागीय रिकॉर्ड इस पूरे मामले के बारे में क्या कहते हैं?
इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच से ही सामने आएगा।
इस मामले की अगली कड़ी में लाइसेंस के दस्तावेज, बीज सैंपलिंग, लैब टेस्टिंग और विभागीय रिकॉर्ड से जुड़े तथ्यों की पड़ताल जारी रहेगी।
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