आरटीआई में वन विभाग का चौंकाने वाला जवाब! करोड़ों के कूप कटिंग कार्यों का रिकॉर्ड ही नहीं ! बिना रिकॉर्ड के होता रहा काम ?
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धरमजयगढ़ – सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में वन विभाग की उत्पादन इकाई धरमजयगढ़ का उत्तर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आवेदक द्वारा वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक उत्पादन इकाई अंतर्गत स्वीकृत सभी कूपों में हुए कूप कटिंग कार्यों की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। इसमें कार्य का नाम, कूप क्रमांक,
वन विभाग के परिक्षेत्राधिकारी, उत्पादन इकाई धरमजयगढ़ ने 30 जून 2026 को दिए गए जवाब में स्पष्ट लिखा है कि मांगी गई जानकारी एवं अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं तथा नया अभिलेख तैयार कर जानकारी उपलब्ध कराने का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए सूचना उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
यह जवाब कई महत्वपूर्ण प्रश्नों को जन्म देता है। यदि कूप कटिंग जैसे सरकारी कार्य स्वीकृत हुए और उन पर राशि व्यय हुई, तो उनसे संबंधित मूल अभिलेख, भुगतान विवरण और प्रशासनिक स्वीकृतियां आखिर किस कार्यालय में सुरक्षित हैं? यदि रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, तो सरकारी कार्यों की निगरानी और वित्तीय पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जा रही है?
आरटीआई के इस उत्तर ने वन विभाग की अभिलेख संधारण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में प्रथम अपील की संभावना भी बनी हुई है। यदि उच्च स्तर पर भी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी रिकॉर्ड के संरक्षण को लेकर बड़ी बहस का विषय बन सकता है।
यह प्रकरण केवल सूचना उपलब्ध कराने का नहीं, बल्कि सरकारी कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और रिकॉर्ड प्रबंधन की वास्तविक स्थिति को उजागर करने वाला महत्वपूर्ण मामला माना जा रहा है।
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