विकास” के नाम पर केवई नदी का गला घोंट रहा अदानी प्रोजेक्ट: राम जी रिंकू मिश्रा
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मिनी बैराज निर्माण के विरोध में जल सत्याग्रह, युवाओं-ग्रामीणों में भारी आक्रोश

कोतमा/अनूपपुर | यशपाल जाट
विधानसभा कोतमा क्षेत्र में प्रस्तावित 3200 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट को लेकर अब विरोध तेज होता जा रहा है। क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली केवई नदी पर कथित रूप से बनाए जा रहे मिनी बैराजों के खिलाफ ग्रामीणों और युवाओं ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को “केवई बचाओ आंदोलन” के बैनर तले चंगेरी क्षेत्र में जिला पंचायत सदस्य राम जी रिंकू मिश्रा के नेतृत्व में युवाओं ने नदी में उतरकर जल सत्याग्रह किया और प्रशासन व कंपनी के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई।
आंदोलन के दौरान राम जी रिंकू मिश्रा ने आरोप लगाया कि “विकास” के नाम पर अदानी प्रोजेक्ट केवई नदी का गला घोंटने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता किसी भी कीमत पर नदी के प्राकृतिक प्रवाह से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उद्योग और प्रशासन की मिलीभगत से नदी के अस्तित्व पर संकट खड़ा किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में पूरे इलाके को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
गांवों में गहराने लगा जल संकट
ग्रामीणों का कहना है कि केवई नदी वर्षों से क्षेत्र के दर्जनों गांवों की प्यास बुझाती आई है, लेकिन अब पावर प्लांट की जरूरतों के लिए नदी पर जगह-जगह मिनी बैराज बनाए जा रहे हैं। इससे निचले हिस्सों में पानी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है और कई गांवों में जल संकट की स्थिति बनने लगी है। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर किसकी अनुमति से नदी के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है।
आंदोलनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि पावर प्लांट की जनसुनवाई के दौरान केवई नदी से पानी लेने या मिनी बैराज निर्माण का कोई उल्लेख नहीं किया गया था। उस समय दावा किया गया था कि प्लांट के लिए सोन नदी से पाइपलाइन के जरिए पानी लाया जाएगा। लेकिन अब जमीन पर सामने आ रही गतिविधियों ने जनसुनवाई की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “दिखाया कुछ गया और किया कुछ जा रहा है।”
रोजगार के नाम पर भी छलावा का आरोप
स्थानीय युवाओं ने आरोप लगाया कि उद्योग लगाने के नाम पर रोजगार के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन अब स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहर के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। युवाओं का कहना है कि क्षेत्र को न रोजगार मिल रहा है और न ही जल संसाधन सुरक्षित रह पा रहे हैं। इसी वजह से अब जनता आंदोलन के लिए मजबूर हो गई है।
मुख्यमंत्री के दौरे पर टिकी निगाहें
बुधवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav के कोतमा आगमन को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं। मुख्यमंत्री राज्य मंत्री Dilip Jaiswal के निवास पर आयोजित विवाह समारोह में शामिल होने पहुंच रहे हैं। ऐसे में आंदोलनकारियों और ग्रामीणों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या मुख्यमंत्री केवई नदी पर बनाए जा रहे मिनी बैराजों के मामले में कोई बड़ा निर्णय लेते हैं या फिर यह मुद्दा यूं ही अनदेखा कर दिया जाएगा।
ग्रामीणों और आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि केवई नदी के प्रवाह से छेड़छाड़ नहीं रोकी गई तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल पानी की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व और क्षेत्र के भविष्य को बचाने की लड़ाई है।

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