एकेएस विश्वविद्यालय में “मॉलिक्युलर एवं क्लीनिकल डायग्नोस्टिक तकनीक” पर राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ
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सतना। एकेएस विश्वविद्यालय, सतना में जैव प्रौद्योगिकी विभाग, एसएचआरएम बायोटेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता तथा पैरामेडिकल विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “मॉलिक्युलर एवं क्लीनिकल डायग्नोस्टिक तकनीक” विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ उद्घाटन समारोह के साथ हुआ।

उद्घाटन सत्र में फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रोफेसर कमलेश चौरे एवं विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अश्विनी वाऊ ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्य और उपयोगिता पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बी.ए. चोपड़े ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मॉलिक्युलर डायग्नोस्टिक्स के वर्तमान महत्व और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. माही चौरे द्वारा किया गया।

कार्यशाला में तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में एसएचआरएम बायोटेक्नोलॉजी, कोलकाता से अर्चिष्मान सरकार एवं श्रीयोशी घोष ने विद्यार्थियों को आरएनए आइसोलेशन एवं हैंडलिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। विशेषज्ञों ने आधुनिक प्रयोगशाला उपकरणों की सहायता से आरएनए पृथक्करण की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया।इस दौरान विद्यार्थियों को न केवल सैद्धांतिक जानकारी दी गई, बल्कि उन्हें स्वयं प्रयोग करने का अवसर भी मिला, जिससे उनकी प्रयोगात्मक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

प्रशिक्षण सत्र में आरएनए की शुद्धता बनाए रखने, संभावित त्रुटियों से बचने तथा प्रयोगशाला सुरक्षा मानकों के पालन पर विशेष बल दिया गया। साथ ही छात्रों ने विभिन्न उपकरणों के संचालन और नमूनों के सुरक्षित प्रबंधन की तकनीकों को भी सीखा।कार्यशाला के संयोजक के रूप में डॉ. कीर्ति समदरिया, परमार केशरी नंदन एवं अर्पित श्रीवास्तव सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वहीं सत्र संचालन में डॉ. माही चौरे, डॉ. विवेक अग्निहोत्री एवं मोनिका सोनी का योगदान रहा तथा प्रयोगशाला सहयोग में नितिन सिंह परिहार, श्रेष्ठ द्विवेदी एवं नंदनी शर्मा ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।आगामी सत्रों में प्रतिभागियों को रीयल-टाइम पीसीआर, आरएनए पृथक्करण, सीडीएनए संश्लेषण, जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस, एलीसा परीक्षण, एफटीआईआर स्पेक्ट्रोस्कोपी, जैव-रसायन ऑटो एनालाइज़र, हेमोसाइटोमेट्रिक विश्लेषण तथा मॉलिक्युलर डॉकिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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