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वैज्ञानिकों की सलाह: सही मिट्टी परीक्षण से बढ़ेगा उत्पादन, AKS यूनिवर्सिटी ने बताई सटीक विधि

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सतना : ए के एस यूनिवर्सिटी वैज्ञानिक: मिट्टी के नमूने लेने, प्रसंस्करण और भंडारण की सही विधिकृषि उत्पादन की सफलता काफी हद तक मिट्टी की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। यही कारण है कि मिट्टी परीक्षण को कृषि का आधार माना जाता है। ए के एस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसान सही तरीके से मिट्टी का नमूना लेकर उसका परीक्षण कराएं, तो वे उर्वरकों का संतुलित उपयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।वैज्ञानिकों के अनुसार, मिट्टी का नमूना लेते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि वह पूरे खेत का प्रतिनिधित्व करे। इसके लिए खेत में ज़िग-ज़ैग पद्धति अपनाते हुए विभिन्न स्थानों से नमूने एकत्र किए जाते हैं। सामान्यतः दो हेक्टेयर क्षेत्र के लिए एक नमूना पर्याप्त माना जाता है, जबकि अधिकतम पाँच हेक्टेयर क्षेत्र से कम से कम एक नमूना अवश्य लिया जाना चाहिए।नमूना लेने के लिए कुदाल या बरमा जैसे उपकरणों का उपयोग किया जाता है। सबसे पहले खेत की सतह से कचरा हटाकर लगभग 15 सेमी (उथली फसलों के लिए) या 30 सेमी (गहरी जड़ों वाली फसलों के लिए) की गहराई तक मिट्टी निकाली जाती है। एक ही खेत के विभिन्न स्थानों से 10 से 15 नमूने लेकर उन्हें आपस में अच्छी तरह मिलाया जाता है, जिससे एक मिश्रित नमूना तैयार हो सके।मिश्रित नमूने को उपयुक्त आकार में लाने के लिए “क्वाटरिंग” विधि अपनाई जाती है, जिसमें नमूने को चार भागों में बांटकर दो भाग हटा दिए जाते हैं और शेष को पुनः मिलाया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है, जब तक लगभग आधा से एक किलोग्राम का प्रतिनिधि नमूना तैयार न हो जाए।इसके बाद नमूने का प्रसंस्करण किया जाता है। मिट्टी को छाया में सुखाकर उसके ढेलों को तोड़ा जाता है और 2 मिमी की छलनी से छाना जाता है। इससे प्राप्त महीन मिट्टी को साफ पॉलीथिन या कांच के कंटेनर में सुरक्षित रखा जाता है। नमूने पर किसान का नाम, खेत का स्थान, फसल विवरण और संग्रह तिथि का स्पष्ट उल्लेख करना आवश्यक होता है।वैज्ञानिक यह भी सलाह देते हैं कि सूक्ष्म पोषक तत्वों के परीक्षण के लिए नमूने को किसी भी प्रकार के धातु संदूषण से बचाया जाए। इसके लिए स्टेनलेस स्टील या प्लास्टिक उपकरणों का ही उपयोग किया जाना चाहिए। वहीं, नाइट्रोजन परीक्षण के लिए नमूने को सूखने से बचाना चाहिए और उसे तुरंत सीलबंद अवस्था में प्रयोगशाला भेजना चाहिए।इस प्रकार, यदि किसान वैज्ञानिक विधि से मिट्टी का नमूना लेते हैं, तो न केवल मिट्टी की वास्तविक स्थिति का पता चलता है, बल्कि उर्वरकों का संतुलित उपयोग कर लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि भी सुनिश्चित की जा सकती है।

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