April 5, 2026

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सेवा, संकल्प और राष्ट्रभाव का सशक्त संगम: ए.के.एस. विश्वविद्यालय का एनएसएस शिविर बना परिवर्तन का आधार

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सतना। जब सेवा केवल कार्यक्रम नहीं बल्कि जीवन दृष्टि बन जाती है, तब उसके परिणाम समाज में स्पष्ट दिखाई देते हैं। ए.के.एस. विश्वविद्यालय, सतना की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाइयों द्वारा ग्राम पंचायत सोहावल में 28 मार्च से 3 अप्रैल 2026 तक आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर ने इसी विचार को साकार रूप दिया—जहां युवा शक्ति ने अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रभाव के साथ समाज के बीच अपनी सक्रिय भूमिका दर्ज कराई।
लगभग 104 स्वयंसेवकों की भागीदारी वाला यह शिविर केवल गतिविधियों का संकलन नहीं, बल्कि उस व्यापक दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण रहा जिसमें “नॉट मी बट यू” का भाव केंद्र में है—एक ऐसा सिद्धांत जो व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ता है।
इन सात दिनों में स्वयंसेवकों ने सोहावल खेल परिसर, सतना नदी स्थित बाबा घाट एवं मुक्तिधाम क्षेत्र में व्यापक स्वच्छता अभियान संचालित किया। जल गंगा संवर्धन योजना के अंतर्गत मेड बंधान जैसे कार्यों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस प्रयास किए गए। वहीं, नेत्र एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविर के माध्यम से 400 से अधिक ग्रामीणों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया गया—यह दर्शाता है कि सेवा यहां प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि परिणाममुखी रही।


3 अप्रैल 2026 को आयोजित समापन समारोह ने इस पूरे अभियान को एक सशक्त निष्कर्ष प्रदान किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सत्येंद्र सिंह, अनुविभागीय दंडाधिकारी नागौद श्री अनिकेत सान्डिल्य, बिरला सीमेंट के वाइस प्रेसिडेंट श्री राजेश एस. चौबे तथा ग्राम पंचायत सोहावल के सरपंच श्री अजय चतुर्वेदी (राजा भैया) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के प्रति कुलाधिपति श्री अनंत कुमार सोनी ने की।
विशिष्ट अतिथियों में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर बी. ए. चोपाड़े, प्रतिकुलपति (विकास) डॉ. हर्षवर्धन, विधि संकाय के सलाहकार श्री सूर्यनाथ सिंह गहरवार, लाइफ साइंसेज के सलाहकार डॉ. जी. पी. रिछारिया तथा अधिष्ठाता-छात्र कल्याण डॉ. महेंद्र कुमार तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति रही।


कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण से हुआ। स्वयंसेवकों द्वारा प्रस्तुत लक्ष्य गीत ने वातावरण को ऊर्जा और प्रतिबद्धता से भर दिया। डॉ. महेंद्र कुमार तिवारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सेवा कार्यों की सामाजिक प्रासंगिकता को रेखांकित किया, जबकि राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दीपक मिश्रा ने शिविर की गतिविधियों का तथ्यपूर्ण एवं सुव्यवस्थित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।


अपने उद्बोधन में श्री सत्येंद्र सिंह ने स्वयंसेवकों को सेवा के मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया और उन्हें प्रेरित करते हुए सम्मानित भी किया। श्री अनिकेत सान्डिल्य ने “नॉट मी बट यू” को केवल नारा नहीं, बल्कि जीवन का मार्ग बताते हुए युवाओं से इसे व्यवहार में उतारने का संदेश दिया। श्री राजेश एस. चौबे ने सामाजिक उत्तरदायित्व को युवाओं की प्राथमिकता बनाने पर बल दिया।
कुलगुरु प्रोफेसर बी. ए. चोपाड़े ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि सेवा गतिविधियां केवल सात दिनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वर्षभर निरंतर प्रयासों के माध्यम से ही वास्तविक परिवर्तन संभव है। अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री अनंत कुमार सोनी ने शिविर की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए भविष्य में ऐसे आयोजनों को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।


इस अवसर पर शिविर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र एवं मेडल प्रदान किए गए। ग्राम पंचायत सोहावल के सरपंच श्री अजय चतुर्वेदी (राजा भैया) को उनके सहयोग के लिए स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया। साथ ही कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दीपक मिश्रा, श्री अयोध्या पाण्डेय, सुश्री गरिमा सिंह एवं डॉ. रमा शुक्ला को शिविर के सफल संचालन हेतु सम्मानित किया गया।
यह शिविर केवल सात दिनों की गतिविधि नहीं, बल्कि उस विचार का विस्तार बनकर उभरा जिसमें सेवा, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण को विकास की आधारशिला माना गया है—जहां युवा केवल सहभागी नहीं, बल्कि परिवर्तन के वाहक बनकर सामने आते हैं।

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