March 31, 2026

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“शकुंतलम पार्क: सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना से बदली वार्ड क्रमांक 8 की पहचान”

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सत्यभूषण सिंह (अध्यक्ष) शाकुंतलम पार्क

सतना।
सतना के वार्ड क्रमांक 8 में स्थित शकुंतलम पार्क आज केवल एक पार्क नहीं, बल्कि यह इस बात का जीवंत प्रमाण बन चुका है कि जब एक व्यक्ति संकल्प लेता है और समाज उसका साथ देता है, तो उपेक्षा भी आदर्श में बदल सकती है।
जहाँ कभी अव्यवस्था और उदासीनता का वातावरण था, वहीं आज हरियाली, अनुशासन और आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। यह परिवर्तन किसी चमत्कार का नहीं, बल्कि निरंतर सेवा, समर्पण और जनसहयोग का परिणाम है।

अनीता निगम (शिक्षक)


संकल्प की शुरुआत: 14 सितंबर 2021
14 सितंबर 2021 को जब इस पार्क को गोद लिया गया, तब शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि यह स्थान एक दिन पूरे शहर के लिए प्रेरणा का केंद्र बन जाएगा। लेकिन दृढ़ निश्चय ने असंभव को संभव कर दिखाया।
151 पौधों से जीवन का विस्तार
कोविड जैसे कठिन समय में, जब लोग अपने घरों में सीमित थे, उस समय सत्यभूषण सिंह और उनकी धर्मपत्नी निधि सिंह ने 151 पौधे लगाने का संकल्प लिया।
आज वे पौधे केवल वृक्ष नहीं हैं—वे इस बात के साक्षी हैं कि सेवा का बीज जब लगाया जाता है, तो वह समाज में आशा का वन बन जाता है।
सेवा जो जीवन बन गई
सत्यभूषण सिंह के लिए यह पार्क कोई स्थान नहीं, बल्कि साधना है।
सुबह की शुरुआत मंदिर की सफाई से, दिनभर व्यवस्था और सिंचाई की देखरेख से—और यही उनका जीवन क्रम बन चुका है।
उनका इस पार्क से ऐसा आत्मिक संबंध है कि यदि किसी दिन वे यहाँ सेवा न कर पाएं, तो उनके भीतर एक बेचैनी जन्म लेती है—मानो जीवन का कोई उद्देश्य अधूरा रह गया हो।
अनुशासन, सहयोग और संस्कार
यहाँ हर सुबह योग, ध्यान और व्यायाम से दिन की शुरुआत होती है, तो शाम को परिवारों की उपस्थिति इसे जीवंत बना देती है।
दीपक निगम, देवेश निगम, मनीष मिश्रा और विकास रामकलेश तिवारी जैसे अनेक लोगों का योगदान इस प्रयास को सामूहिक आंदोलन का रूप देता है।
संवेदनशीलता की जीवंत मिसाल
“नेकी की दीवार” जरूरतमंदों के लिए आशा का सहारा बनी है
“पक्षी दाना केंद्र” जीवों के प्रति करुणा का प्रतीक है
गर्मियों में रखे जाने वाले सकौरे मानवता और प्रकृति के संतुलन का संदेश देते हैं
यहाँ की हरियाली और पक्षियों की चहचहाहट मानो यह कहती है—“जहाँ सेवा है, वहीं सच्चा सुख है।”
अब खुशबू से महकेगा वातावरण
अब इस पार्क में पुष्पदार और सुगंधित पौधों का रोपण किया जा रहा है, जिससे यह स्थान केवल हरा-भरा ही नहीं, बल्कि सुगंधित और और भी आकर्षक बनेगा।
सेवा का केंद्र, पुनर्निर्माण की प्रतीक्षा
यहाँ स्थित सामुदायिक भवन वर्षों से गरीब कन्याओं के विवाह और सामाजिक कार्यक्रमों का साक्षी रहा है। आज इसकी जर्जर स्थिति एक नई शुरुआत की प्रतीक्षा कर रही है।
प्रशासन ने भी सराहा प्रयास
हाल ही में योगेश ताम्रकार, महापौर, ने निरीक्षण कर इस कार्य की सराहना की और आवश्यक सुधारों के निर्देश दिए।
डिजिटल पहचान, बढ़ती पहुँच
अब यह पार्क इंटरनेट पर भी पंजीकृत है, जिससे बाहर से आने वाले लोगों के लिए यहाँ पहुँचना आसान हो गया है।
आध्यात्मिक केंद्र बनने की दिशा
शिव मंदिर के माध्यम से इसे एक ऐसे स्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ केवल शरीर नहीं, बल्कि मन और आत्मा को भी शांति मिले।
एक व्यक्ति, जिसने सोच बदल दी
सत्यभूषण सिंह ने अपने अथक प्रयासों से यह साबित कर दिया है कि परिवर्तन के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े संकल्प की आवश्यकता होती है।
उनकी यह यात्रा केवल एक पार्क तक सीमित नहीं है—यह समाज को यह संदेश देती है कि यदि हर व्यक्ति अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाए, तो पूरा शहर बदल सकता है।
आभार और स्वीकार्यता
उन्होंने वार्ड क्रमांक 8 के पार्षद, महापौर योगेश ताम्रकार, नगर निगम प्रशासन, श्री सी.एल. पटेल एवं काशीदीन वर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
शकुंतलम पार्क आज एक स्थान नहीं, बल्कि एक विचार है—सेवा का, समर्पण का और उस बदलाव का, जो हर वार्ड, हर शहर और हर व्यक्ति के भीतर संभव है।

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