रामपुर-बटुरा ओपन कास्ट माइन से बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी, कोल डस्ट और ब्लास्टिंग से खेती व जल स्रोत प्रभावित
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अनूपपुर/शहडोल।

अनूपपुर एवं शहडोल जिले की सीमा पर स्थित रामपुर-बटुरा ओपन कास्ट कोयला खदान एक बार फिर विवादों में है। खदान संचालन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित ग्रामीण खेती बर्बादी, प्रदूषण और जल संकट जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
रामपुर-बटुरा माइन के शुरू होने के बाद से ही नौकरी, मुआवजा, पुनर्वास नीति एवं स्थानीय रोजगार को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। वर्तमान में ग्रामीणों ने खदान में हो रही भारी ब्लास्टिंग और कोयला परिवहन से फैल रहे कोल डस्ट को अपनी मुख्य समस्या बताया है।
यह परियोजना एसईसीएल द्वारा निजी कंपनी जय अम्बे रोडलाइंस को सौंपी गई है, जो उत्पादन से लेकर परिवहन तक का कार्य कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित ग्राम रामपुर और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित ग्राम खाड़ा के लोगों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
ग्राम खाड़ा के किसानों के अनुसार, खदान से उड़ने वाली कोयले की धूल खेत, घर और तालाब तक पहुंच रही है, जिससे फसलें प्रभावित हो रही हैं। किसानों का कहना है कि धान एवं सब्जी की खेती कोल डस्ट के कारण सही ढंग से नहीं हो पा रही, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
भारी ब्लास्टिंग के कारण जल स्रोत एवं ट्यूबवेल भी प्रभावित हो रहे हैं, जिससे गांव में जल संकट की स्थिति बन गई है। पीएचई विभाग द्वारा बनाई गई पानी की टंकी में पानी भरने के लिए किए गए बोर भी ब्लास्टिंग के प्रभाव से असफल हो गए हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा स्थानीय प्रभावित लोगों को रोजगार देने में प्राथमिकता नहीं दी जा रही, जबकि सीएसआर मद से भी गांव में अपेक्षित विकास कार्य नहीं हुए हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन एवं संबंधित प्रबंधन से समस्याओं के समाधान की मांग की है, ताकि प्रभावित गांवों को राहत मिल सके।



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