नया रोजगार गारंटी कानून गरीबों से काम और पंचायतों का अधिकार छीनने की साजिश — रितुराज सिंह ठाकुर
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धरमजयगढ़ – मनरेगा के स्थान पर लागू किए जा रहे नये ग्रामीण रोजगार कानून को लेकर कांग्रेस ने तीखा विरोध किया है। इस संबंध में शनिवार 30 जनवरी को ब्लॉक मुख्यालय में धरना प्रदर्शन और सांकेतिक चक्का जाम के बाद एक औपचारिक भेंट के दौरान धरमजयगढ़ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रितुराज सिंह ठाकुर ने कहा कि यह नया कानून केवल नाम बदलने की कवायद ही नहीं है है, बल्कि इसके साथ ही असल में यह गरीब, मजदूर और किसान से उसका रोजगार का संवैधानिक अधिकार छीनने की साजिश है।

श्री ठाकुर ने बातचीत में कहा कि मनरेगा देश के ग्रामीण गरीबों के लिए किसी योजना से अधिक अधिकार था। इसके तहत हर परिवार को काम मांगने पर रोजगार देना सरकार की कानूनी जिम्मेदारी थी, लेकिन नये कानून में काम को बजट और सरकारी मर्जी पर छोड़ दिया गया है। इससे लाखों मजदूरों का भविष्य असुरक्षित हो गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार 125 दिन काम देने का दावा कर रही है, लेकिन जब काम की कोई कानूनी गारंटी ही नहीं होगी, तो यह केवल कागजी घोषणा बनकर रह जाएगी। काम नहीं मिलने की स्थिति में मिलने वाला बेरोजगारी भत्ता भी नये प्रावधानों में कमजोर कर दिया गया है।
खेती के मौसम में 60 दिन तक मनरेगा कार्य रोकने के प्रावधान पर नाराजगी जताते हुए रितुराज सिंह ठाकुर ने कहा कि छोटे और सीमांत किसान स्वयं मजदूरी पर निर्भर रहते हैं। ऐसे समय में रोजगार रोकना उनके लिए दोहरी मार साबित होगा।

उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और आदिवासी क्षेत्रों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि मनरेगा ने महिलाओं को गांव में सम्मानजनक रोजगार दिया और पलायन को रोका। यदि यह व्यवस्था कमजोर हुई तो छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में फिर से पलायन बढ़ेगा।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को लेकर गांव-गांव जन आंदोलन चलाएगी और सरकार से मांग करेगी कि नया कानून तत्काल वापस लिया जाए, मनरेगा की तरह रोजगार को फिर से कानूनी अधिकार बनाया जाए और ग्रामसभा व पंचायतों को पूर्ण अधिकार दिए जाएं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने गरीबों के हक पर हो रहे इस हमले को वापस नहीं लिया, तो कांग्रेस सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।
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