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बसंत पंचमी : ऋतु, ज्ञान और नवचेतना का उत्सव

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आज बसंत पंचमी का पावन पर्व है। यह दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि प्रकृति के नवजागरण, ज्ञान की आराधना और जीवन में उल्लास के प्रवेश का प्रतीक है। शीत ऋतु की विदाई और बसंत के आगमन के साथ धरती पर हरियाली लौट आती है, खेतों में सरसों के पीले फूल मुस्कराने लगते हैं और वातावरण में एक नई ऊर्जा का संचार होता है।
बसंत पंचमी को विद्या और वाणी की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इसीलिए विद्यालयों, महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में विद्या आरंभ, पुस्तक पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। छात्र-छात्राएँ आकर्षक परिधान धारण कर ज्ञान, बुद्धि और विवेक की कामना करते हैं।
बसंत पंचमी का पीला रंग अपने आप में आशा, ऊर्जा और समृद्धि का संदेश देता है। पीले फूल, पीले वस्त्र और पीले व्यंजन इस पर्व की पहचान हैं। यह रंग सूर्य की ऊष्मा और प्रकाश का प्रतीक है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर जीवन को आलोकित करता है।
यह पर्व हमें सिखाता है कि ज्ञान ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर ही सच्चा विकास संभव है। बसंत पंचमी मनुष्य को निरंतर सीखते रहने, सकारात्मक सोच अपनाने और समाज में सौहार्द फैलाने का संदेश देती है।
आज के इस पावन अवसर पर आइए हम सब मिलकर ज्ञान, कला और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लें तथा अपने जीवन में बसंत की तरह नई उमंग और नई शुरुआत का स्वागत करें। माँ सरस्वती की कृपा से सबका जीवन ज्ञान, शांति और प्रगति से परिपूर्ण हो—यही बसंत पंचमी का सच्चा संदेश है। 

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