अमृत सरोवर या काग़ज़ी कारनामों का तालाब?
1 min read

धरमजयगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत सलका में निर्मित अमृत सरोवर एक बार फिर स्थानीय चर्चाओं के केंद्र में है। जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण जरूरतों को ध्यान में रखकर शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना में वर्तमान में सरोवर में पानी भरा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद योजना के निर्धारित मानकों के पालन को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं।

स्थल की वास्तविक स्थिति पर नजर डालें तो स्पष्ट नजर आता है कि निर्माण कार्य स्पष्ट में तय मानकों और निर्धारित प्रारूप की पूरी तरह अनदेखी की गई है । जानकारों का कहना है कि आवश्यक घटकों के बिना न तो जल संरक्षण दीर्घकालिक रूप से प्रभावी हो सकता है और न ही सरोवर सामाजिक-पर्यावरणीय उपयोग के योग्य बन पाता है।

पारदर्शिता को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा रही। सरोवर परिसर में लगाए गए साइन बोर्ड में कार्य से संबंधित सम्पूर्ण विवरण अंकित नहीं है। योजना की स्वीकृत राशि, घटकवार कार्यों का विवरण, तकनीकी जानकारी और कार्य निष्पादन की स्पष्ट सूचना का अभाव चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि सूचना बोर्ड में अधूरी जानकारी होना आमजन को भ्रमित करता है और सवालों को जन्म देता है।
यह भी आशंका बनी हुईं है कि पुराने तालाब के गहरीकरण को ही मुख्य कार्य मानते हुए परियोजना को पूर्ण दर्शा दिया गया है। जबकि अमृत सरोवर योजना की अवधारणा केवल गहरीकरण तक सीमित नहीं, बल्कि संरचनात्मक मजबूती, सौंदर्यीकरण और पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ी हुई है।
किसी भी शासकीय योजना की सफलता केवल पानी भरने या कागज़ी पूर्ति से नहीं, बल्कि निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य पूर्ण होने से आंकी जाती है। ऐसे में अमृत सरोवर के विभिन्न घटकों की भौतिक और तकनीकी जांच आवश्यक हो जाती है।
इस मामले के सम्बन्ध में जिला कलेक्टर महोदय को भी अवगत करा दिया गया है और अपेक्षा है कि मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जाँच जल्द ही शुरू हो सकती है !
Subscribe to my channel