ए.के.एस.विश्वविद्यालय के डिप्लोमा छात्रों का ग्रेयू सोलर एनर्जी में चयन।
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सतना। मध्य प्रदेश के तकनीकी शिक्षा परिदृश्य में ए.के.एस. विश्वविद्यालय एक बार फिर उस मॉडल को मजबूत करता दिख रहा है, जहाँ कक्षा में सीखी गई तकनीकी दक्षता सीधे औद्योगिक अवसरों में बदल रही है। विश्वविद्यालय के डिप्लोमा इलेक्ट्रिकल एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग संकाय के 2026 बैच के विद्यार्थियों का चयन ग्रेयू सोलर एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड में डिप्लोमा ट्रेनी इंजीनियर के पद पर हुआ है। चयनित विद्यार्थियों की जॉब लोकेशन नर्मदापुरम और भोपाल क्षेत्र में निर्धारित की गई है, जिसे राज्य में उभरते सोलर एनर्जी कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग संकाय से चयनित विद्यार्थियों में अजय वर्मा,सतीश पांडे,मोहित सिंह, नवी चौरसिया,भूपेंद्र कुमार शामिल हैं। मैकेनिकल
इंजीनियरिंग विभाग से आशीष सिंह, प्रियांशु पांडे,राहुल सिंह,विनीत यादव और सचिन प्रजापति को यह अवसर प्राप्त हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, चयन प्रक्रिया में तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, सेफ्टी अवेयरनेस और इंडस्ट्रियल एथिक्स पर विशेष ध्यान दिया गया।
सोलर एनर्जी सेक्टर और युवा तकनीशियनों की मांग
ग्रेयू सोलर एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड भारत के तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सक्रिय कंपनियों में से एक है। ऐसे समय में जब सरकार और निजी क्षेत्र दोनों सोलर एनर्जी को भविष्य की ऊर्जा मान रहे हैं, डिप्लोमा स्तर के प्रशिक्षित इंजीनियरों की मांग लगातार बढ़ रही है। विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट विभाग के अनुसार, यह चयन दर्शाता है कि डिप्लोमा शिक्षा अब केवल सहायक भूमिका तक सीमित नहीं, बल्कि तकनीकी उद्योग की रीढ़ बन रही है।
नेतृत्व की प्रतिक्रिया और संस्थागत दृष्टिकोण। विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर श्री अनंत कुमार सोनी, कुलपति प्रोफेसर बी.ए. चोपडे, प्रतिकुलपति डॉ. हर्षवर्धन और प्रतिकुलपति प्रो.आर.एस. त्रिपाठी ने चयनित विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दीं। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग अध्यक्ष श्रीहरि पांडे और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग अध्यक्ष इंजीनियर रमा शुक्ला ने इसे विभागीय शिक्षण गुणवत्ता और इंडस्ट्री-ओरिएंटेड पाठ्यक्रम का परिणाम बताया।
ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट हेड बलेंद्र विश्वकर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय का फोकस केवल प्लेसमेंट आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वर्क-रेडी प्रोफेशनल के रूप में तैयार करना है। प्रफुल्ल गौतम और मनोज सिंह ने भी चयन प्रक्रिया में विद्यार्थियों के अनुशासन और तकनीकी समझ की सराहना की।
कैंपस में निरंतर गतिविधियाँ। शिक्षा से परे एक जीवंत वातावरण।
ए.के.एस. विश्वविद्यालय का कैंपस इन दिनों केवल कक्षाओं और प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। यहाँ नियमित रूप से इंडस्ट्री एक्सपोजर प्रोग्राम, तकनीकी कार्यशालाएँ, सोलर एवं इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ड्रिल्स, मैकेनिकल हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग और करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही सांस्कृतिक, खेल और नवाचार आधारित गतिविधियाँ छात्रों के सर्वांगीण विकास को गति दे रही हैं।
विश्वविद्यालय के प्रोचांसलर अनंत कुमार सोनी ने कहा कि हर विद्यार्थी के करियर को सही दिशा देना संस्थान का मूल उद्देश्य है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बदलते औद्योगिक परिदृश्य में विश्वविद्यालय लगातार अपने पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण मॉडल को अपडेट कर रहा है, ताकि छात्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।

शिक्षा और उद्योग का संगम।
ए.के.एस. विश्वविद्यालय का यह प्लेसमेंट न केवल चयनित विद्यार्थियों के लिए एक उपलब्धि है, बल्कि यह संकेत भी है कि भारत के क्षेत्रीय विश्वविद्यालय किस तरह स्थानीय प्रतिभाओं को वैश्विक ऊर्जा संक्रमण का हिस्सा बना रहे हैं। जब शिक्षा, उद्योग और नीतिगत प्राथमिकताएँ एक दिशा में आगे बढ़ती हैं, तब ऐसे उदाहरण सामने आते हैं—जहाँ कैंपस से निकलकर छात्र सीधे देश के विकास इंजन से जुड़ जाते हैं।
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