एकेएस यूनिवर्सिटी में विज्ञान स्नातक अनुपमा पटनहा एक स्वर जो दिशा देता है।
1 min read



भारत के युवा नेतृत्व की नई परिभाषा।
सतना। जब भारत अपने भविष्य की बागडोर युवाओं के हाथों सौंपने की बात करता है, तब कुछ नाम केवल उपलब्धियों के कारण नहीं, बल्कि विचारों की स्पष्टता, दृष्टि की परिपक्वता और अभिव्यक्ति की प्रभावशीलता के कारण विशेष पहचान बनाते हैं। विकसित भारत – युवा नेता संवाद में चयनित प्रतिभागियों में अनुपमा पटनहा ऐसी ही एक प्रभावशाली युवा वक्ता के रूप में उभरकर सामने आई हैं—एक ऐसी आवाज़, जिनके शब्द केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि दिशा देने वाला विचार बनते हैं।
देशभर से चयनित युवाओं को प्रश्नोत्तरी चरण, निबंध लेखन चरण और प्रस्तुतीकरण चरण जैसी बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। विचारों की इस कठोर कसौटी पर अंततः केवल शीर्ष आठ प्रतिभागियों का चयन हुआ, जिनमें अनुपमा पटनहा को भोपाल में आयोजित साक्षात्कार चरण के लिए आमंत्रित किया गया। यह उपलब्धि उनकी बौद्धिक क्षमता के साथ-साथ एक संतुलित और जिम्मेदार वक्ता के रूप में उनकी परिपक्वता को भी रेखांकित करती है।अनुपमा पटनाहा, श्री अरविंद पटनहा एवं श्रीमती मीना पटनहा की सुपुत्री हैं और वर्तमान में एकेएस यूनिवर्सिटी में विज्ञान स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। युवा महोत्सव में उन्होंने जिला स्तर पर प्रथम स्थान तथा क्षेत्रीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त कर यह सिद्ध किया कि उनकी वक्तृत्व क्षमता केवल अभ्यास का परिणाम नहीं, बल्कि गहन विचार और सामाजिक समझ से उपजी हुई है।उनकी प्रतिभा का विस्तार शैक्षणिक और सांस्कृतिक मंचों से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक संस्थाओं तक पहुँचा है। अनुपमा ने मध्य प्रदेश विधानसभा तथा महिला संसद में अपने जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए युवाओं की आवाज़ को गरिमा और स्पष्टता के साथ प्रस्तुत किया। इन मंचों पर उनके विचारों में आत्मविश्वास के साथ-साथ संवैधानिक चेतना और सार्वजनिक उत्तरदायित्व भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
विकसित भारत – युवा नेता संवाद के अंतर्गत अनुपमा ने “भारत को विश्व का नवउद्यम केंद्र बनाना” विषय को चुना। उनके अनुसार, नवउद्यम आज के भारत में केवल आर्थिक विकास का साधन नहीं, बल्कि रोज़गार सृजन, नवाचार और आत्मनिर्भरता का आधार हैं। वह मानती हैं कि भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने के लिए केवल बड़े और चर्चित उद्यमों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थानीय नवाचार, द्वितीय और तृतीय श्रेणी के नगरों के युवा तथा ग्रामीण प्रतिभाओं को भी मुख्यधारा में लाना आवश्यक है। भाषण देते समय अनुपमा के लिए श्रोता, उद्देश्य और सामाजिक जिम्मेदारी सर्वोपरि रहती है। उनका मानना है कि एक युवा वक्ता के शब्द मंच तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि समाज की सोच को दिशा देने वाले होने चाहिए। यही दृष्टिकोण उन्हें अन्य वक्ताओं से अलग करता है—जहाँ प्रस्तुति से अधिक विचार की गंभीरता और प्रभाव को महत्व दिया जाता है।
भविष्य को लेकर अनुपमा का सपना स्पष्ट और दृढ़ है। वह युवा सशक्तिकरण और सार्वजनिक नेतृत्व के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाते हुए यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी केवल प्रतीकात्मक न रह जाए, बल्कि वास्तविक और प्रभावी बने।इस वैचारिक यात्रा में अनुपमा अपने मार्गदर्शक असि. प्रो.प्रतीक निगम को विशेष श्रेय देती हैं। उनके मार्गदर्शन ने अनुपमा को न केवल मंच पर प्रभावी ढंग से बोलना सिखाया, बल्कि दायित्व, दृष्टि और सामाजिक चेतना के साथ सोचने की प्रेरणा भी दी। उल्लेखनीय है कि असि.प्रो. प्रतीक निगम स्वयं भी एक श्रेष्ठ वक्ता के रूप में पहचाने जाते रहे हैं। आज के समय में, जब युवा नेतृत्व अक्सर तात्कालिक लोकप्रियता और सतही विमर्श तक सीमित रह जाता है, अनुपमा पटनहा एक संयमित, विचारशील और दूरदर्शी स्वर के रूप में सामने आती हैं—एक ऐसी आवाज़, जो भारत के भविष्य को केवल देखती नहीं, बल्कि उसे सार्थक दिशा देने का साहस भी रखती है।
Subscribe to my channel