मॉनिटरिंग और कार्रवाई के अभाव में जारी है भर्राशाही ? आखिर किसके शह में चल रहा खेल ?
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धरमजयगढ़ क्षेत्र में विकास कार्यों की मॉनिटरिंग और भौतिक सत्यापन की कमी अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। गाँवों में कई ऐसे कार्य सामने आ रहे हैं जिनकी हकीकत जमीन पर कुछ और है और कागज़ों पर कुछ और। स्थानीय लोग बताते हैं कि न केवल अधूरे कार्यों को पूर्ण दिखाया जा रहा है बल्कि कई मामलों में तो ऐसे काम भी रिकॉर्ड में ‘सम्पन्न’ लिख दिए गए हैं जिनकी शुरुआत तक नहीं की गई।bइसके बावजूद जब शिकायतें लगातार विभिन्न मंचों, माध्यमों और अधिकारियों तक पहुँचती हैं, फिर भी कार्रवाई का न होना कई सवालों को जन्म दे रहा है। आखिर ऐसी लापरवाही किसके भरोसे चल रही है और कौन है जो इस सुस्ती को संरक्षण दे रहा है? तथ्य यह भी बताते हैं कि जब मॉनिटरिंग कमजोर हो जाए, सत्यापन केवल औपचारिकता बन जाए और शिकायतों पर कार्रवाई का इंतज़ार महीनों तक खिंचता रहे, तब पूरे सिस्टम की पारदर्शिता खुद-ब-खुद संदेह के घेरे में आ जाती है। धरमजयगढ़ में भी यही हो रहा है, जवाबदेही की बजाय खामोशी हावी है, और अनियमितताओं पर रोक लगाने की बजाय स्थितियाँ ढँकी-छिपी चलती दिख रही हैं।
यदि किसी भी स्तर पर भौतिक सत्यापन सही ढंग से किया जाए, तो कई कामों की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। लेकिन जब न निरीक्षण होता है, न फील्ड विजिट, और न ही शिकायतों का संज्ञान—तो यह स्पष्ट संकेत है कि भर्राशाही को रोकने की इच्छा खुद व्यवस्था के भीतर से ही कमजोर पड़ चुकी है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब विभिन्न माध्यमों से जिम्मेदारों तक शिकायतें पहुँच रही हैं, तथ्य सामने हैं, फिर भी कार्रवाई नहीं…तो आखिर यह मौन किसके लिए है ?
क्या यह केवल लापरवाही है, या फिर किसी स्तर पर इस ढिलाई को सचमुच शह मिल रही है ?
अभी भी यदि समय रहते मॉनिटरिंग और सत्यापन को सख़्ती से लागू नहीं किया गया, तो विकास कार्यों की साख पर लगा सवालिया निशान और गहरा होता जाएगा!
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