कूड़ेकेला धान खरीदी केंद्र में किसानों की पीड़ा अब खुलकर सामने आने लगी है। सालभर की कमाई और उम्मीदें लेकर पहुंचे किसानों को जिस सहयोग की अपेक्षा थी, उसकी जगह उन्हें उपेक्षा और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। मुनुनद गाँव के किसान ने नियमों के अनुसार पहले नमी मापक यंत्र से धान की जांच कराई और कर्मचारियों के कहने पर धान ट्रैक्टर से उतरवा भी दिया, लेकिन दोबारा नमी जांचने पर अचानक मानक पूरा न होने का हवाला देकर पूरा धान वापस ले जाने का आदेश दे दिया गया। किसान ने मामूली नमी बताते हुए मंडी परिसर में थोड़ी जगह देकर धान सुखाने की अनुमति मांगी, पर उसकी आवाज़ तक नहीं सुनी गई और उसे विवश होकर धान लेकर लौटना पड़ा।
कूड़ेकेला धान खरीदी केंद्र में यह स्थिति अब आम होती जा रही है। कई किसानों को इसी तरह धान वापस भेजे जाने की बातें सामने आ रही हैं, जिससे किसानों पर अतिरिक्त परिवहन खर्च और मानसिक तनाव लाद दिया गया है। खेतों से मेहनत की फसल लेकर आने वाले किसानों के मन में यह चिंता गहरा रही है कि यदि अगली जांच में भी धान को मानक से बाहर बताया गया तो उनकी सालभर की मेहनत का क्या होगा क्योंकि उनके पास ना तो नमी मापक यँत्र है , न कोई ऐसी तकनीक जिससे वे ठीक ठीक निर्धारित मानक के अनुसार धान की नमी का पता लगा सकें !