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ए.के.एस. विश्वविद्यालय के मानविकी विभाग में विश्व विरासत सप्ताह का अत्यंत प्रभावी और गरिमामय शुभारंभ

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ए.के.एस. विश्वविद्यालय के मानविकी विभाग में विश्व विरासत सप्ताह (19–25 नवम्बर) का शुभारंभ अत्यंत सुसंगत, सुव्यवस्थित और सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन और कुलगीत के मधुर गायन से हुई। विभागाध्यक्ष डॉ. ऊषा द्विवेदी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए स्पष्ट किया कि विश्व विरासत सप्ताह भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर, स्थापत्य वैभव और परंपराओं के संरक्षण के संकल्प को पुनर्स्मरण कराने का महत्वपूर्ण अवसर है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रतिकुलगुरु डॉ. हर्षवर्धन, विशिष्ट अतिथि विधि सलाहकार डॉ. सूर्यनाथ सिंह गहरवार तथा डीन डॉ. सुधीर कुमार जैन की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की प्रभावशीलता को और सुदृढ़ किया।

मुख्य अतिथि डॉ. हर्षवर्धन ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में विन्ध्य क्षेत्र की प्राचीन धरोहरों, पुरातात्विक महत्व, और ब्रिटिश काल से अब तक की खोजों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि रीवा संभाग विरासत की दृष्टि से अत्यंत संपन्न है तथा इन धरोहरों का संरक्षण प्रत्येक नागरिक का प्राथमिक कर्तव्य है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. सूर्यनाथ सिंह ने ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण को सामाजिक पहचान, सांस्कृतिक निरंतरता और सामुदायिक चेतना से जोड़ते हुए कहा कि विरासत संरक्षण केवल स्थापत्य रक्षा नहीं, बल्कि समाज की आत्मा की रक्षा है। उन्होंने ऐसे आयोजनों की निरंतरता पर जोर दिया।

डीन डॉ. सुधीर कुमार जैन ने बघेलखंड व बुंदेलखंड क्षेत्र की प्राचीन संरचनाओं, मंदिरों, गुफाओं और महत्त्वपूर्ण स्थापत्य धरोहरों की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थी ऐसे अध्ययनों से न केवल इतिहास बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भी समझते हैं।

विभाग की ओर से बताया गया कि सप्ताह भर विद्यार्थियों में संरक्षण भावना जागृत करने हेतु विविध गतिविधियाँ—प्रदर्शनी, जागरूकता व्याख्यान, निबंध-चित्र प्रतियोगिताएँ एवं शैक्षणिक भ्रमण—आयोजित किए जाएंगे।

कार्यक्रम का सटीक और प्रभावी संचालन उप-अधिष्ठाता छात्र-कल्याण गौरव सिंह ने किया। अंत में डॉ. उदयभान सिंह ने अतिथियों, विद्यार्थियों और विभागीय सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस आयोजन की सफलता में डब्ल्यूडीसी की निदेशक डॉ. प्रियंका बागरी का विशेष सहयोग रहा। विभाग से श्रीमती प्राची सिंह और अश्विनी कुमार ओमरे की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
विश्वविद्यालय के चेयरमैन इंजीनियर अनंत कुमार सोनी, कुलगुरु प्रो. बी.ए. चोपड़े, प्रति कुलगुरु प्रशासन डॉ. आर.एस. त्रिपाठी तथा डायरेक्टर आईक्यूएसी प्रो. जी.सी. मिश्रा ने आयोजन की उत्कृष्ट सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की।

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