*जननायक भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती*केवलारी महाविद्यालय में जनजातीय गौरव दिवस गरिमामय ढंग से आयोजित
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केवलारी | 16 नवंबर 2025*
शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय केवलारी में आज “जननायक भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती एवं जनजातीय गौरव दिवस समारोह” उत्साह, श्रद्धा और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम (CMCLDP) के छात्र-छात्राओं द्वारा मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के ब्लॉक समन्वयक श्री अशोक बेंद्रे के मार्गदर्शन एवं मेंटर्स के सहयोग से आयोजित किया गया।
*प्रारंभ : दीप प्रज्वलन और प्रेरक गीत से सजी शुरुआत*
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा के छायाचित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात मंगलाचरण और प्रेरक गीत “स्वयं अब जाकर जगाना देश है अपना” की प्रस्तुति ने सभा में ऊर्जा का संचार किया।
*मुख्य वक्ता श्री अशोक बेंद्रे का उद्बोधन*
विकासखंड समन्वयक श्री अशोक बेंद्रे ने बिरसा मुंडा के जीवन दर्शन और संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केवल 25 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने जनजातीय समाज में क्रांति का अलख जगाया।
उन्होंने कहा—
‘उलगुलान’ भारत का प्रथम संगठित जनजातीय आंदोलन था।
“अबुआ देशुम, अबुआ राज” आज भी आत्मसम्मान और अधिकार चेतना का प्रतीक है।
उनका संघर्ष शोषण, अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध सामूहिक जागरण का संदेश देता है।
*मेंटर्स के प्रेरक उद्बोधन : ‘धरती आबा’ के विचारों की अनुगूंज*
*श्री राधेश्याम बंदेवार*
उन्होंने सामाजिक एकता पर बल देते हुए कहा कि बिरसा मुंडा ने दिखाया—
“संघर्ष छोटा नहीं होता; यदि लक्ष्य समाज की भलाई हो तो हर कदम इतिहास बन जाता है।”
*श्री रामकृष्ण डहेरिया*
उन्होंने न्याय और नशा-मुक्ति पर केंद्रित संदेश देते हुए कहा कि अन्याय को सहना भी एक अपराध है। अंत में उन्होंने सभी को नशामुक्ति की शपथ दिलाई।
*श्री मोतीराम हरदुआ*
उन्होंने बताया कि ‘उलगुलान’ विद्रोह मात्र नहीं था, बल्कि स्वाभिमान और अस्तित्व की लड़ाई थी। जल–जंगल–जमीन की रक्षा आज भी बिरसा के विचारों से प्रेरणा लेती है।
*श्री बालकराम डहेरिया*
उन्होंने अपने उद्बोधन की शुरुआत प्रभावी शायरी से की—
*“धरती की गोद से उठकर,* *क्रांति का दीप जलाया था,*
*कम उम्र में भी अंग्रेज़ी सिंहासन हिला कर दिखाया था।*
*अमर रहे वो धरती आबा, जिनका नाम बिरसा मुंडा है,*
*जिन्होंने जन-जन को स्वाभिमान का रास्ता समझाया था।”**
उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन तीन महत्वपूर्ण संदेश देता है—
१)अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना,
२)समाज को संगठित करना,
३)अपनी पहचान और संस्कृति को शक्ति मानना।
*सुश्री कलावती ठाकुर*
उन्होंने कहा कि “धरती हमारी माँ है” बिरसा मुंडा का जीवन-दर्शन था। पर्यावरण और संस्कृति संरक्षण उनके विचारों का मूल था।
*छात्र–छात्राओं के विचार : उत्साह और प्रेरणा की झलक*
कार्यक्रम में प्रभाकर बिसेन, अमन, श्रीमती जमुना अहरवार और कु. भारती पांडे ने संयुक्त रूप से अपने विचार रखते हुए कहा कि बिरसा मुंडा केवल एक नाम नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, साहस, संस्कृति-सुरक्षा और जन-जागरण की जीवंत धरोहर हैं।
भगवान बिरसा मुंडा का जीवन युवाओं में हौसला, जागरूकता और आत्मसम्मान भरता है।
*मंच संचालन और समापन*
कार्यक्रम का मंच संचालन एमएसडब्ल्यू के छात्र अजय नागेश्वर ने कुशलतापूर्वक किया। कार्यक्रम का समापन नशामुक्ति शपथ के साथ हुआ।
*पूरे आयोजन में छात्रों, मेंटर्स तथा श्री अशोक बेंद्रे की सक्रिय उपस्थिति और मार्गदर्शन से कार्यक्रम अत्यंत सफल, प्रेरणादायक और जनजागरणकारी रहा।*
उद्घोष समय न्यूज़
जिला ब्यूरो चीफ
प्रभात ठाकुर
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