मुर्गे के बिल से निर्माण तक………., 15वें वित्त की राशि पर बड़े खेल का संदेह !
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धरमजयगढ़ – धरमजयगढ़ क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में 15वें वित्त आयोग से स्वीकृत कार्यों में अनियमितताओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। कहीं बिलों का भुगतान रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा, तो कहीं ग्राम सभा प्रस्तावों और स्वीकृत राशि में भारी विरोधाभास सामने आने लगे हैं। हालात ये हैं कि निर्माण सामग्री के बिलों में मुर्गा तक जोड़ दिया गया और भुगतान पीएफएमएस से पास भी हो गया। ऐसे में यह सवाल गूंजने लगा है कि आखिर यह मनमानी कर कौन रहा है, डाटा एंट्री करता कौन है और वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी आखिर निभा कौन रहा है।

ग्राम पंचायतों के रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया कि कई स्थानों पर न तो कार्य स्थल पर बोर्ड मौजूद हैं, न ही धरातल पर निर्माण कार्य दिखता है, लेकिन भुगतान पूरे और समय पर कर दिए गए। पोर्टल पर दर्ज कई एंट्रियों में सामग्री एक, भुगतान दूसरा और प्रस्ताव तीसरा दिख रहा है, जिससे शक गहराता जा रहा है कि यह कोई साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि योजनाबद्ध खेल हो सकता है। क्या भुगतान आदेश जनपद और पंचायत स्तर पर मिलीभगत से जारी हुए, जबकि ग्राम सभा को विश्वास में लेना तो दूर, कई प्रस्तावों में हस्ताक्षर तक फर्जी होने की आशंका है।
अब इन भुगतानो में सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि आखिर बिलों की वेरिफिकेशन करने वाला कौन था और उस पर कार्रवाई कब होगी। सवाल उठ रहे रहे हैं कि यदि यह पूरा खेल संगठित तरीके से हुआ, तो संरक्षण किसका था और आदेश किस स्तर से जारी होते रहे। विकास कार्यों के नाम पर हुए इस वित्तीय खिलवाड़ ने जनपद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


इस तथ्य की खोज जरुरी है कि 15वें वित्त की राशि विकास में लगी या किसी के निजी जेब में। क्या जमीनी स्तर पर काम हुये हैं यदि नहीं तो “काम ज़मीन पर नहीं, फिर भुगतान कैसे?” यदि पुरे मामले की जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हुई तो कई नाम सामने आने तय माने जा रहे हैं।
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