जीएसटी निष्क्रिय, फिर भी बिल लगाकर ले रहे भुगतान — सरकार की आँखों में धूल झोंक रहे वेंडर, हो रहा राजस्व का नुकसान
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धरमजयगढ़ – सरकारी विभागों से जुड़े कुछ वेंडर और सप्लायर जीएसटी नंबर निष्क्रिय (GST Inactive) होने के बावजूद बिल प्रस्तुत कर भुगतान ले रहे हैं, जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। यह मामला गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है, फिर भी संबंधित विभागों की लापरवाही और मिलीभगत के कारण ऐसे प्रकरण लगातार सामने आ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के जीएसटी रजिस्ट्रेशन या तो रद्द हैं या अस्थायी रूप से निलंबित, फिर भी वे विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत सामग्री आपूर्ति और सेवाओं के बदले भुगतान प्राप्त कर रहे हैं। विभागीय अधिकारी बिना जीएसटी स्थिति की जाँच किए बिलों को स्वीकृति दे रहे हैं, जिससे कर चोरी की संभावना बढ़ गई है।
वित्तीय नियमों के अनुसार, किसी भी सप्लायर या वेंडर को तभी भुगतान किया जा सकता है जब उसका जीएसटी नंबर सक्रिय हो और वह वैध टैक्स इनवॉइस जारी करे। निष्क्रिय जीएसटी के बावजूद भुगतान लेना न केवल जीएसटी अधिनियम 2017 का उल्लंघन है, बल्कि यह राजकोषीय अनुशासन के साथ धोखाधड़ी भी माना जा सकता है। इस प्रकार के मामलों में सरकार को न केवल राजस्व हानि होती है, बल्कि वैध व्यवसाय करने वाले पंजीकृत व्यापारी भी नुकसान में रहते हैं!
जिले के विभिन्न ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में यह प्रथा आम होती जा रही है।
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि पीने का पानी, सड़क मरम्मत, बालू, सीमेंट, पाइप, मुरुम, बिजली सामग्री, बेंच, कंप्यूटर, प्रिंटर जैसे सामानों की सप्लाई का दावा कर ठेकेदार सादे कागज पर बिल लगाकर भुगतान प्राप्त कर रहे हैं।
इनमें से अधिकांश के पास या तो जीएसटी नंबर निष्क्रिय है या वे जानबूझकर सादा बिल जारी कर टैक्स बचा रहे हैं।
यदि प्रशासन द्वारा समय रहते जांच नहीं की गई तो यह प्रवृत्ति व्यापक कर चोरी का रूप ले सकती है।ऐसे वेंडरों की सूची तैयार कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए, साथ ही भुगतान प्रक्रिया में जीएसटी सत्यापन को अनिवार्य किया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितता रोकी जा सके।यदि समय रहते जांच नहीं की गई, तो यह प्रवृत्ति सरकारी राजस्व के बड़े नुकसान का कारण बन सकती है और भ्रष्टाचार के नए रास्ते खोल सकती है।
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