रायगढ़: मेडिकल स्टोर की आड़ में चल रहा फर्जी क्लिनिक — वीडियो में दिखे इंजेक्शन और ड्रेसिंग, ग्रामीणों में हड़कंप
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बिना डॉक्टर के इलाज और बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा देने के आरोप; उद्घोष समय की टीम ने की मौके पर पड़ताल, प्रशासन को सौंपी जानकारी
उद्घोष समय, लैलूंगा/रायगढ़।
रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम लारिपानी (केनापारा) में संचालित “Pradhan Medical & General Store” पर गंभीर अनियमितताओं की शिकायत मिली है।
मौके पर उद्घोष समय की टीम जब पहुंची तो पाया गया कि इस मेडिकल स्टोर की आड़ में क्लीनिक जैसी गतिविधियां चलाई जा रही हैं — जिनमें बिना डॉक्टर की मौजूदगी के इंजेक्शन लगाना, टूटी हड्डियों को जोड़ना और ड्रेसिंग जैसी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं शामिल हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि उक्त मेडिकल स्टोर के संचालक बाबूलाल प्रधान हैं, जबकि इलाज का कार्य उनके पिता द्वारा किया जाता है।
जब हमारी टीम ने मौके पर पड़ताल की और वीडियो बनाया, तो संचालक ने स्वीकार किया कि —
“मेरे पिताजी की गलती है, हमें यह काम नहीं करना चाहिए था। अब हम इसे बंद कर देंगे।”
संचालक द्वारा की गई यह स्वीकारोक्ति उद्घोष समय की टीम के पास ऑडियो रिकॉर्डिंग के रूप में सुरक्षित है, जो इस मामले का प्रत्यक्ष साक्ष्य मानी जा सकती है।
परंतु आश्चर्यजनक रूप से, दयाधि प्रधान (पिता) ने पत्रकार को धमकी देते हुए कहा कि —
“हम माननीय ओ.पी. चौधरी जी को जानते हैं, और उनसे आपकी शिकायत करेंगे।”
इस बयान ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या अवैध क्लिनिक संचालन को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?

सूत्रों के हवाले से चौंकाने वाली जानकारी
सूत्रों के अनुसार, यह भी बताया जा रहा है कि इसी मेडिकल स्टोर के संचालक या उनके पिता के ऊपर पहले भी एक गंभीर मामला दर्ज हो चुका है, जिसमें लैलूंगा निवासी एक व्यक्ति (खान साहब) की इलाज के दौरान कथित मृत्यु हो गई थी।
सूत्रों का दावा है कि इस प्रकरण में न्यायालयीन कार्रवाई के बाद संबंधित व्यक्ति को सजा भी हुई थी और उन्हें जेल भेजा गया था।
हालांकि, उद्घोष समय यह स्पष्ट करता है कि इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं की जा सकी है, और समाचार पत्र केवल प्राप्त सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दे रहा है।
इस तथ्य की पुष्टि व जांच प्रशासन द्वारा कराई जाना आवश्यक है, ताकि यदि यह सही पाया जाए, तो संबंधित व्यक्ति के लाइसेंस व गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
टीम की कार्रवाई और प्रशासन को सूचना
उद्घोष समय की टीम द्वारा घटनास्थल से वीडियो और ऑडियो साक्ष्य एकत्रित किए गए हैं। वीडियो में स्पष्ट रूप से दवाइयां देते और इंजेक्शन लगाते हुए दृश्य दिखाई देते हैं।
इस पूरे मामले की जानकारी तत्काल रायगढ़ के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), क्षेत्रीय एसडीओपी सिद्धांत तिवारी और लैलूंगा थाना प्रभारी बंजारा को व्हाट्सएप और कॉल के माध्यम से भेजी गई।
सभी अधिकारियों ने इस मामले में विशेष जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
संभावित कानूनी धाराएं (संकेतात्मक)
यदि ये आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह कई गंभीर कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत आता है —
- Drugs and Cosmetics Act, 1940
- बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के Schedule-H/H1 श्रेणी की दवाइयों की बिक्री कानूनी अपराध है।
- Clinical Establishments (Registration & Regulation) Act
- बिना पंजीकरण या योग्य डॉक्टर के चिकित्सा गतिविधियां चलाना अवैध क्लिनिकल संचालन की श्रेणी में आता है।
- Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) / IPC की धाराएं (संकेतात्मक):
- धारा 269 – लापरवाही से जनस्वास्थ्य को खतरा पहुंचाना
- धारा 270 – जानबूझकर खतरनाक कृत्य करना
- धारा 304A – लापरवाही से मृत्यु या गंभीर चोट
- धारा 420 – धोखाधड़ी से आर्थिक लाभ लेना
इन प्रावधानों के तहत, संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
उद्घोष समय की मांग
- मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), रायगढ़ द्वारा तत्काल जांच कर मेडिकल स्टोर की वैधता, लाइसेंस और संचालन की स्थिति की पुष्टि की जाए।
- यदि पाया जाए कि बिना डॉक्टर की देखरेख में दवाइयां दी जा रही हैं या इलाज किया जा रहा है, तो मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निलंबित किया जाए।
- बिना पंजीकरण क्लिनिक संचालन पर क्लिनिकल एक्ट के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
- ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए इस तरह के सभी फर्जी इलाज केन्द्रों की जांच जिलेभर में की जाए।
- यदि “खान साहब” से जुड़ा पुराना प्रकरण सत्य पाया जाता है, तो इस मामले को पुनः खोलकर कड़ी विधिक कार्रवाई की जाए।
जनता के लिए चेतावनी
यदि कोई भी व्यक्ति बिना डॉक्टर की उपस्थिति या प्रिस्क्रिप्शन के इंजेक्शन, ड्रेसिंग या इलाज कर रहा है तो तत्काल इसकी सूचना थाना या CMHO कार्यालय को दें।
बिना योग्य डॉक्टर के इलाज कराना आपके जीवन के लिए खतरा बन सकता है।
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक अवैध क्लीनिक का नहीं बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था की नाकामी और प्रशासनिक निष्क्रियता का दर्पण है।
अब देखना यह है कि CMHO रायगढ़ और लैलूंगा पुलिस प्रशासन इस गंभीर प्रकरण पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करते हैं —
क्योंकि सवाल सिर्फ कानून का नहीं, जनता की ज़िंदगी और भरोसे का है।
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