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“प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा घोटाला – बोकरामुड़ा में कागज़ों पर बना मकान, ज़मीन पर गायब!”

धरमजयगढ़। प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी का बड़ा मामला जनपद पंचायत धरमजयगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत बोकरामुड़ा (विधायक लालजीत सिंह राठिया का गृहग्राम) से सामने आया है। योजना के तहत स्वीकृत मकान का न तो निर्माण हुआ और न ही नींव रखी गई, फिर भी लाखों की राशि का आहरण कर लिया गया और जियो टैगिंग भी पूरी कर दी गई।

मामला क्या है?

ग्राम रीलो की निवासी पांचो बाई महंत, जो कि गाँव की कोटवार भी हैं, को वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ था। योजना के तहत कुल 1.20 लाख रुपये की राशि मिलनी थी।

दस्तावेजों में आवास निर्माण पूर्ण दर्शाकर दो किश्तों की राशि निकाल ली गई।

जियो टैगिंग भी पूरी हो चुकी है।

लेकिन वास्तविकता यह है कि मकान की नींव तक नहीं रखी गई।

आरोप है कि किसी और के मकान की फोटो को पांचो बाई का बताकर जियो टैगिंग कर दी गई। पांचो बाई का कहना है कि गाँव में उनकी निजी जमीन ही नहीं है, इसलिए उन्होंने अपने दामाद के गाँव नरकालो में मकान बनाना शुरू किया है।

बड़ा सवाल

योजना के नियमों में साफ है कि मकान लाभार्थी के अपने गाँव में ही बनना चाहिए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि –

क्या योजना के तहत किसी अन्य गाँव में मकान बनाया जा सकता है?

यदि जमीन नहीं थी तो पंचायत ने वैकल्पिक जमीन उपलब्ध क्यों नहीं कराई?

कोटवार के पास परंपरागत कोटवारी जमीन होती है, वह कहाँ गई?

सरपंच और आवास मित्र आमने-सामने

ग्राम सरपंच श्याम कुमार राठिया का कहना है कि जियो टैगिंग का कार्य आवास मित्र के अधिकार क्षेत्र में आता है, उनसे राय नहीं ली जाती। हाँ, उन्होंने कोटवार का काम जल्द करने को जरूर कहा था, लेकिन मकान नहीं बनने की जानकारी उन्हें नहीं थी।

वहीं आवास मित्र अंजू भगत का कहना है कि उन्होंने सरपंच के कहने पर ही जियो टैगिंग की थी।

यानी जिम्मेदारी से बचने के लिए दोनों एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।

अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि मकान बने बिना राशि जारी कैसे हो गई? बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान होना गंभीर अनियमितता को दर्शाता है। अंजू भगत पाँच पंचायतों की आवास योजना देखती हैं। ऐसे में संदेह गहराता है कि अन्य पंचायतों में भी इसी तरह की धांधली हो रही होगी।

आगे क्या?

अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले की कितनी गंभीरता से जांच करता है और दोषियों पर कार्रवाई होती है या नहीं। क्या प्रधानमंत्री आवास योजना में फर्जीवाड़े की यह काली परंपरा रुकेगी, या फिर यह मामला भी फाइलों की धूल में दबकर रह जाएगा?

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