धरमजयगढ़ में कोल ब्लॉकों का इतिहास : कोलगेट में रद्द हुए ब्लॉक, क्या नई व्यवस्था से बदलेगी तस्वीर !
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धरमजयगढ़ – एक समय ऐसा था जब धरमजयगढ़ को देश के सबसे बड़े कोयला क्षेत्रों में गिना जाने लगा था। वर्ष 2007-08 के दौरान यहां कई कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए, लेकिन वर्ष 2014 में देश के चर्चित कोलगेट प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने स्क्रीनिंग समिति के माध्यम से किए गए अधिकांश कोयला ब्लॉक आवंटनों को अवैध घोषित कर रद्द कर दिया। इस फैसले का सीधा असर धरमजयगढ़ क्षेत्र पर भी पड़ा, जहां डी.बी. पावर, बालको (वेदांता) सहित कई कंपनियों के आवंटन निरस्त हो गए।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में दुर्गापुर-II/सरिया कोल ब्लॉक डी.बी. पावर लिमिटेड को तथा दुर्गापुर-II/तराईमार कोल ब्लॉक बालको (वेदांता समूह) को आवंटित किया गया था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद ये आवंटन समाप्त हो गए। इसके बाद केंद्र सरकार ने नई व्यवस्था के तहत इन ब्लॉकों का पुनः आवंटन किया ! इनमें से एक आबंटी के पी सी एल की प्रक्रिया वर्तमान में आगे बढ़ रही है और क्षेत्र में सर्वाधिक चर्चित कोल ब्लॉको में से एक है !
प्रतिस्पर्धी नीलामी से हो रहा आबंटन
अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। पुराने आवंटनों की जगह केंद्र सरकार प्रतिस्पर्धी नीलामी के माध्यम से नए कोयला ब्लॉक आवंटित कर रही है। धरमजयगढ़ क्षेत्र में पुरुंगा, शेरबंद, , बायसी, दुर्गापुर-शाहपुर सहित कई नए और प्रस्तावित कोयला ब्लॉक चर्चा में हैं। इनमें से कुछ में वन एवं पर्यावरण स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है, जबकि कुछ परियोजनियां अभी प्रारंभिक चरण में हैं। इन प्रस्तावित परियोजनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर विस्थापन, वन संरक्षण, हाथी गलियारे और ग्रामसभा की भूमिका जैसे मुद्दे लगातार उठ रहे हैं।
धरमजयगढ़ की कोयला परियोजनाओं का इतिहास यह बताता है कि यह क्षेत्र केवल खनिज संपदा का केंद्र ही नहीं, बल्कि कानूनी, पर्यावरणीय और सामाजिक एकता का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। वर्ष 2014 में रद्द हुए आवंटनों के बाद शुरू हुई नई नीलामी व्यवस्था ने एक नया अध्याय खोला है, लेकिन अब भी कई परियोजनाओं की राह वन स्वीकृति, पर्यावरणीय अनुमति और स्थानीय सहमति जैसे महत्वपूर्ण चरणों से होकर गुजर रही है।
इसलिये रद्द हुये थे कोल ब्लॉक –
यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि धरमजयगढ़ के डी.बी. पावर, बालको (वेदांता) सहित अन्य कोयला ब्लॉकों का आवंटन स्थानीय जनविरोध या किसी आंदोलन के कारण रद्द नहीं हुआ था। ये आवंटन देशव्यापी ‘कोलगेट’ विवाद में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय के परिणामस्वरूप निरस्त हुए थे, जिसमें स्क्रीनिंग समिति के माध्यम से किए गए अधिकांश कोयला ब्लॉक आवंटनों को अवैध घोषित किया गया था। हालांकि आबंटन रद्द होने से पहले स्थानीय व्यापक जनविरोध ने पूरे देश में सुर्खियां बटोरी थी , और गली कूचे से लेकर स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय रही थी !

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