ए के एस विश्वविद्यालय में ‘कोनियाप्स–३२’ का भव्य शुभारंभ: सतत विकास, ब्रह्मांड विज्ञान और “विश्व सरकार” की अवधारणा पर वैश्विक वैज्ञानिक मंथन
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सतना।
सतना स्थित ए के एस विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषद कोनियाप्स–३२ का भव्य एवं ऊर्जा से परिपूर्ण शुभारंभ हुआ, जहाँ विश्व-स्तरीय वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, गणित तथा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसटीएम–यूएनएसडीजीएस–२०२६) पर गहन विमर्श प्रारंभ किया। तीन दिवसीय यह वैश्विक वैज्ञानिक सम्मेलन ज्ञान, नवाचार और बहु-विषयी अनुसंधान के माध्यम से मानव सभ्यता के सतत भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण बौद्धिक मंच बनकर उभरा है।
सम्मेलन का उद्घाटन रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री, लंदन के मानद सचिव प्रो. आर.के. शर्मा ने किया। अपने उद्घाटन उद्बोधन में उन्होंने कहा कि समकालीन वैज्ञानिक अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता के दीर्घकालिक विकास, पर्यावरणीय संतुलन और वैश्विक ज्ञान संरचना का आधार बन चुका है।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण डॉ. शैलेन्द्र यादव ने प्रस्तुत किया, जबकि परिचयात्मक उद्बोधन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.ए. चोपड़े ने दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान और गणित की अंतर्विषयी शक्ति ही पृथ्वी के सतत भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
कार्यक्रम में राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आई.पी. त्रिपाठी, अंतर्राष्ट्रीय भौतिकी विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष प्रो. एस.एन. उपाध्याय, जय प्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.के. बाजपेयी तथा किंग्स्टन विश्वविद्यालय, लंदन की वैज्ञानिक डॉ. कृष्णा शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी विद्वानों ने सम्मेलन को वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग और ज्ञान-संवाद की दिशा में एक सशक्त पहल बताया।
तीन वैज्ञानिक सत्रों में ज्ञान का प्रवाह
सम्मेलन के तकनीकी सत्र तीन समानांतर व्यवस्थाओं—दो प्रत्यक्ष (ऑफलाइन) और एक ऑनलाइन—पर संचालित किए जा रहे हैं।
सत्र–१ का संचालन डॉ. एकता श्रीवास्तव, डॉ. धीरज सिंह चौहान और आर.के. शुक्ला ने किया।
सत्र–२ का संचालन डॉ. ऋषि भारद्वाज और समन्वयक ओ.पी. त्रिपाठी ने किया।
सत्र–३ का संचालन डॉ. साकेत कुमार और वैशाली पाण्डेय ने किया।
प्रथम दिवस के सत्रों में डॉ. कृष्णा शर्मा ने सतत रसायन विज्ञान के क्षेत्र में औषधीय संश्लेषण के लिए पेट्रोलियम आधारित विलायकों के पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों पर महत्वपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किया।
प्रो. मुकुट मणि त्रिपाठी (आईआईटी–बीएचयू) और प्रो. वी. लोकेशा (वीएसके विश्वविद्यालय) ने ब्रह्मांड की जालक ज्यामिति, गणितीय संरचनाओं और ब्रह्मांडीय प्रतिरूपों के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। वहीं आईआईटी रुड़की के विद्वानों ने जैव प्रौद्योगिकी, संक्षारण अवरोधक तथा ब्रह्मांड विज्ञान के क्षेत्रों में अपने नवीन शोध प्रस्तुत किए।
युवा वैज्ञानिकों की सृजनात्मक ऊर्जा
ई-ब्लॉक के सी-फ्लोर में आयोजित पोस्टर प्रदर्शनी में स्नातक, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने अपने शोध-आधारित नवाचार प्रस्तुत किए, जो सम्मेलन के प्रमुख आकर्षण बने। इस अवसर पर छात्रों की भरपूर सहभागिता देखने को मिली।
दिवस का समापन विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक संध्या से हुआ, जिसमें लोकनृत्य और संगीतमय प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
५४० से अधिक वैज्ञानिकों की वैश्विक सहभागिता
सम्मेलन में ५४० से अधिक वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की भागीदारी हो रही है, जिनमें आईआईटी, बीएचयू और लंदन के प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं। स्मृति व्याख्यान, आमंत्रित व्याख्यान और पोस्टर प्रतियोगिता इसके प्रमुख आयाम हैं। आयोजकों के अनुसार आगामी सत्रों में होने वाला वैज्ञानिक संवाद वैश्विक शोध सहयोग और सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में नए आयाम स्थापित करेगा।
आईएपीएस फेलोशिप पुरस्कार की घोषणा
इस अवसर पर आईएपीएस के उपाध्यक्ष प्रो. एस.एन. उपाध्याय द्वारा आईएपीएस फेलोशिप की घोषणा की गई। वहीं प्रो. ए.के. मिश्रा ने घोषणा की कि अंतर्राष्ट्रीय भौतिकी विज्ञान अकादमी की ओर से आईएपीएस फेलोशिप पुरस्कार प्रतिष्ठित वैज्ञानिक प्रो. प्रभाकर सिंह (आईआईटी–बीएचयू) और प्रो. रंजीत उपाध्याय (आईएसएम धनबाद) को उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा।
“विश्व सरकार” की अवधारणा पर वैचारिक प्रस्तुति
सम्मेलन के दौरान विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर अनंत कुमार सोनी ने विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी.पी. सोनी के विचारों को साझा करते हुए “विश्व सरकार” की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और वैश्विक ज्ञान नेटवर्क मानवता को ऐसी साझा व्यवस्था की ओर ले जा सकते हैं जहाँ जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संकट और मानव विकास जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान सामूहिक वैज्ञानिक बुद्धिमत्ता और वैश्विक सहयोग से संभव हो सके।
स्मारिका विमोचन और सम्मान
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को स्मृति-चिह्न प्रदान किए गए तथा सम्मेलन की स्मारिका का विधिवत विमोचन किया गया।
सम्मेलन के सफल आयोजन में डॉ. सी.पी. सिंह (भौतिकी विभागाध्यक्ष), डॉ. सुधा अग्रवाल (गणित विभागाध्यक्ष), डॉ. दिनेश मिश्रा (समन्वयक, आधारभूत विज्ञान), मनीष अग्रवाल (उप अधिष्ठाता, छात्र कल्याण), नीलकंठ नापित (उप अधिष्ठाता, छात्र कल्याण), डॉ. मनोज शर्मा, कन्हन सिंह तिवारी, पुष्पा कुशवाहा, सोनम खरे, सुंदरम खरे, दिनेश वाल्मीकि, डॉ. सुषमा सिंह परिहार, ओमेंद्र तिवारी, शुभम पांडेय, वंदना सोनी और वैशाली पांडेय सहित अनेक शिक्षकों, शोधार्थियों और कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका रही।
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