एकेएस यूनिवर्सिटी में ‘बायो क्रिएशन 2026’
विंध्य से उठती जैव-अर्थव्यवस्था की नई आवाज़: प्रयोगशाला, स्टार्टअप और विकसित भारत–2047 का संगम
1 min read
सतना। भारत जब 2047 की ओर अपने विकास–विजन को ठोस आकार देने में जुटा है, तब यह प्रश्न निर्णायक हो जाता है कि क्या देश के विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान रहेंगे या वे नवाचार, उद्यमिता और वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता के वास्तविक इंजन बनेंगे। विंध्य अंचल की शैक्षणिक पहचान बन चुका ए के एस विश्वविद्यालय, सतना, इसी प्रश्न का उत्तर अपने तीन दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन “बायो क्रिएशन 2026: बायो इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप समिट” के माध्यम से देने जा रहा है, जो 19 से 21 फरवरी 2026 तक आयोजित होगा।
फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित यह समिट केवल एक अकादमिक कैलेंडर की प्रविष्टि नहीं, बल्कि जैव-प्रौद्योगिकी को प्रयोगशाला की सीमाओं से बाहर निकालकर अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के व्यापक परिप्रेक्ष्य में स्थापित करने का सुविचारित प्रयास है। यह आयोजन विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बायोटेक्नोलॉजी के इकोनॉमी, एनवायरनमेंट एंड एंप्लॉयमेंट—BioE3—के त्रि-आयामी दृष्टिकोण से जोड़ते हुए विकसित भारत–2047 की राष्ट्रीय संकल्पना के साथ समन्वित करने का मंच प्रदान करेगा।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. एस. पी. गौतम की उपस्थिति कार्यक्रम को बौद्धिक ऊँचाई प्रदान करेगी। विश्वविद्यालय के माननीय कुलाधिपति श्री बी. पी. सोनी जी, प्रो-चांसलर अनंत कुमार सोनी, कुलपति प्रोफेसर बी. ए. चोपड़े, प्रो-वाइस चांसलर, डीन अकादमिक, रजिस्ट्रार तथा समस्त डीन एवं विभागाध्यक्षों की गरिमामयी उपस्थिति इस आयोजन को संस्थागत प्रतिबद्धता और नेतृत्व की स्पष्ट दिशा देगी।
समिट की संरचना विचार से क्रियान्वयन तक की यात्रा को ध्यान में रखते हुए दो प्रमुख ट्रैकों में की गई है। ट्रैक–1 में पोस्टर प्रस्तुति, क्विज, वाद-विवाद, मॉडल निर्माण, एक्सटेम्पोर, फोटोग्राफी और रील मेकिंग प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी—जहाँ शोध, तर्क और रचनात्मकता का समागम होगा। वहीं ट्रैक–2 में डिजाइन थिंकिंग, आइडिया पिचिंग, बिजनेस मॉडल कैनवास, एमवीपी विकास और स्टार्टअप पिच जैसी गतिविधियाँ प्रतिभागियों को वास्तविक बाजार-परिदृश्य से परिचित कराएँगी, ताकि वैज्ञानिक विचार व्यवहारिक उद्यम में परिवर्तित हो सकें।
समापन दिवस अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञता का संगम प्रस्तुत करेगा। यूनिवर्सिटी ऑफ़ पीसा, इटली के डॉ. प्रशांत शर्मा “बायोसेंसर टेक्नोलॉजी एवं स्मार्ट डायग्नोस्टिक सिस्टम” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे—एक ऐसा क्षेत्र जो स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, त्वरित और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में अग्रणी माना जा रहा है। वहीं सी एस आई आर , एडवांस्ड मैटेरियल्स एंड प्रोसेस रिसर्च इंस्टीट्यूट सीएसआईआर, एडवांस्ड मैटेरियल्स और प्रोसेस रिसर्च इंस्टीट्यूट) के निदेशक डॉ. टी. भास्कर “नवीन जैव-ईंधन प्रौद्योगिकी एवं जैव-अर्थव्यवस्था” विषय पर मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे, जो सतत ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और जैव-विज्ञान आधारित औद्योगिक भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित करेगा।
कार्यक्रम के संरक्षक के रूप में माननीय कुलाधिपति श्री बी. पी. सोनी जी, प्रो-चांसलर अनंत कुमार सोनी एवं कुलपति प्रोफेसर बी. ए. चोपड़े मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। संयोजक प्रो. कमलेश चौरे, डीन, फैकल्टी ऑफ लाइफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी एवं निदेशक, सीआरआईआईएसडी, इस आयोजन को अकादमिक दृष्टि और उद्योग-अकादमिक समन्वय के साथ दिशा दे रहे हैं। समन्वयक के रूप में प्रो. अश्विनी ए. बाऊ और डॉ. महेंद्र कुमार तिवारी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जबकि सचिव के रूप में डॉ. दीपक मिश्रा, डॉ. माही चौरे और डॉ. विवेक अग्निहोत्री के साथ सौरभ सिंह, अर्पित श्रीवास्तव तथा बायोटेक एवं एनवायरनमेंट विभाग के समस्त फैकल्टी सदस्य आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने में संलग्न हैं।
प्रो. कमलेश चौरे के शब्दों में, “बायो क्रिएशन 2026 केवल एक समिट नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच है जहाँ अनुसंधान, नवाचार, उद्योग-अकादमिक सहयोग और उद्यमिता एक साझा भविष्य का खाका तैयार करते हैं। यह आयोजन विद्यार्थियों को व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएगा।”
विंध्य की धरती पर आयोजित यह समिट इस व्यापक सत्य को रेखांकित करता है कि जब विश्वविद्यालय विचारों को उद्यम में रूपांतरित करने का साहस करता है, तभी ज्ञान नीति बनता है, नवाचार उद्योग बनता है और शिक्षा राष्ट्र-निर्माण की शक्ति में परिवर्तित हो जाती है। ‘बायो क्रिएशन 2026’ इसी परिवर्तनकारी यात्रा का सशक्त अध्याय बनने की ओर अग्रसर है।
Subscribe to my channel