मैहर जिले में जन्म प्रमाणपत्र फर्जीवाड़ा! चौकीदार पर गंभीर आरोप, तहसील में मचा हड़कंप
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ताला/अमरपाटन (जिला-मैहर, मध्य प्रदेश) — मैहर जिले की अमरपाटन तहसील के अंतर्गत ग्राम ललितपुर नं. 2 में जन्म प्रमाणपत्र बनाने के नाम पर फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम निवासी वंशराज दाहिया (55 वर्ष) ने गांव के चौकीदार दलवीर सिंह पटेल पर न सिर्फ 500 रुपये अवैध रूप से लेने, बल्कि पटवारी के फर्जी हस्ताक्षर लगाकर रिपोर्ट तहसील में जमा कराने का गंभीर आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
आवेदन के अनुसार, वंशराज दाहिया ने अपनी पुत्री शिवानी दाहिया का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दलवीर सिंह को आवश्यक दस्तावेज और 500 रुपये दिए थे। आरोप है कि दलवीर सिंह ने भरोसा दिलाया कि वह पटवारी से रिपोर्ट लगवाकर प्रमाणपत्र बनवा देगा।
लेकिन जब वंशराज प्रमाणपत्र लेने पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि फाइल तहसीलदार कार्यालय में है। दिनांक 09 फरवरी 2026 को जब वे तहसील कार्यालय पहुंचे, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ—फाइल में पटवारी हल्का ललितपुर नं. 2 की रिपोर्ट पर फर्जी हस्ताक्षर पाए गए और मामला जांच में चला गया।
शपथ पत्र में गंभीर खुलासे
वंशराज दाहिया ने शपथपूर्वक बयान में कहा है कि—
- फाइल उन्होंने स्वयं दलवीर सिंह को सौंपी थी।
- 500 रुपये प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर लिए गए।
- तहसील में जमा फाइल में पटवारी के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए।
- हस्ताक्षर स्वयं दलवीर सिंह या उसके किसी सहयोगी द्वारा कराए गए हो सकते हैं।
प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल
यह मामला सिर्फ एक ग्रामीण के साथ धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था में संभावित सेंध का संकेत देता है। यदि एक चौकीदार स्तर का व्यक्ति पटवारी की रिपोर्ट पर फर्जी हस्ताक्षर कर दस्तावेज तहसील में जमा कर सकता है, तो यह पूरे तंत्र की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न है।
संभावित धाराएँ और कानूनी पहलू
कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो भारतीय दंड संहिता की धाराएँ जैसे—
- धोखाधड़ी (Cheating)
- जालसाजी (Forgery)
- कूटरचना (Fabrication of documents)
लागू हो सकती हैं।
मांग — निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई
प्रार्थी ने नायब तहसीलदार, उपतहसील ताला, तहसील अमरपाटन से लिखित शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच एवं दोषी के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर प्रकरण में कितनी तत्परता दिखाता है। क्या फर्जी हस्ताक्षर करने वालों तक जांच पहुंचेगी? क्या ग्रामीणों को प्रमाणपत्र के नाम पर वसूली से राहत मिलेगी?
उद्घोष समय इस मामले पर नजर बनाए हुए है। यदि आपके पास भी इससे जुड़ी कोई जानकारी है, तो हमें अवश्य साझा करें।
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