खनन को हरी झंडी देने के लिए दबाया गया हाथियों का सच ? रिपोर्ट से गायब की गई विचरण की जानकारी ! जांच की मांग
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धरमजयगढ़ – ग्राम सेमीपाली खुर्द की साधारण पत्थर खदान को लेकर वन विभाग में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि खनन पट्टा स्वीकृति से पहले जंगली हाथियों के नियमित विचरण और उनके पारंपरिक मार्ग में बाधा से जुड़ी अहम जानकारी को अंतिम प्रतिवेदनों से जानबूझकर हटाया गया, ताकि खदान को मंजूरी दिलाई जा सके।
मामला भारतमाला परियोजना से जुड़ा है, जिसके लिए दिलीप बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा गौण खनिज की आपूर्ति की जा रही है। खनन से पूर्व किए गए स्थल निरीक्षण में वन परिक्षेत्र धरमजयगढ़ के डिप्टी रेंजर और वन परिक्षेत्र अधिकारी ने स्पष्ट दर्ज किया था कि खनन क्षेत्र हाथियों के नियमित विचरण वाला है और खदान खुलने से उनके आवागमन में गंभीर बाधा उत्पन्न होगी। डिप्टी रेंजर के प्रतिवेदन के बिंदु क्रमांक 15 में क्षेत्र को तीनों दिशाओं से वन से घिरा बताया गया है।
इसके बावजूद आरोप है कि उप वन मंडल अधिकारी द्वारा वन मंडल अधिकारी को भेजे गए प्रतिवेदन में इन संवेदनशील तथ्यों को बिना कारण बताए हटा दिया गया। बाद में वन मंडल अधिकारी द्वारा जिला कलेक्टर को भेजे गए पत्र में भी हाथियों के विचरण का उल्लेख नहीं किया गया। मैदानी अमले की चेतावनी को दरकिनार किए जाने से पद के दुरुपयोग और पर्यावरणीय तथ्यों को दबाने की आशंका गहरा गई है।
शिकायतकर्ता ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री से उच्चस्तरीय जांच और खनन पट्टा निरस्त करने की मांग की है। शिकायत के साथ विभागीय पत्राचार की सत्यापित प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।
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