ऊँचेहरा (सतना)। निर्जन भरहुत पहाड़ के पास जब एक नवजात शिशु लावारिस हालत में पड़ा मिला, तो मानो इंसानियत शर्मसार हो गई। न बोल पाने वाला वह मासूम, अपनी पहली सांसों के साथ ही मौत से जूझ रहा था। सूचना मिलते ही पुलिस उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऊँचेहरा पहुँची, जहाँ उसकी हालत बेहद नाज़ुक थी।
यहीं से शुरू हुई इंसानियत की जीत। सीबीएमओ डॉ. ए.के. राय के नेतृत्व में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने बिना एक पल गंवाए इलाज शुरू किया। डॉ. विनीत गुप्ता, डॉ. (श्रीमती) अनामिका राय, डॉ. श्रुति अग्रवाल, स्टाफ नर्स अनिता तोमर, एएनएम और बीपीएम संजीव ताम्रकार ने उस नन्हे जीवन को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए।
इलाज के बाद जब मासूम की सांसें स्थिर हुईं, तो स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती अन्य प्रसूता माताओं ने भी मां बनने का धर्म निभाया। उनकी सहमति से शिशु को वेट फीडिंग कराई गई—ममता ने ममता को बचाया।
हालत में सुधार के बाद डॉ. ए.के. राय ने विशेष 108 एंबुलेंस से नर्सिंग स्टाफ के साथ नवजात को जिला अस्पताल सतना भेजा, ताकि उसे बेहतर इलाज मिल सके।
यह घटना एक सवाल भी छोड़ जाती है— जिस समाज में कोई मासूम यूँ छोड़ दिया जाए, वहाँ जवाबदेही किसकी है? लेकिन साथ ही यह भरोसा भी देती है कि जब तक ऐसे डॉक्टर, नर्स और ममतामयी महिलाएँ हैं, तब तक इंसानियत ज़िंदा है।