सतना।एकेएस विश्वविद्यालय के में सेंटर फॉर ग्रीन केमिस्ट्री एंड सस्टेनेबिलिटी में विकसित एक उन्नत स्मार्ट विद्युत-अपघटन हाइड्रोजन उत्पादन उपकरण को यूनाइटेड किंगडम में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पंजीकरण की मान्यता प्राप्त हुई है। यह पंजीकरण वर्ष 1949 के पंजीकृत अभिकल्प अधिनियम के अंतर्गत 9 दिसंबर 2025 को दर्ज किया गया तथा 17 दिसंबर 2025 को स्वीकृत हुआ।यह उपलब्धि स्वच्छ ऊर्जा की वैश्विक आवश्यकता के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक हस्तक्षेप के रूप में देखी जा रही है। इस अनुसंधान कार्य में विश्वविद्यालय के प्रो चांसलर श्री अनंत कुमार सोनी की सक्रिय सहभागिता रही, उपकरण का विकास विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों—डॉ. शैलेन्द्र यादव, डॉ. धीरज सिंह चौहान तथा डॉ. एम. ए. कुरैशी—के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें उच्च ऊर्जा दक्षता, नियंत्रित हाइड्रोजन उत्पादन तथा सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान दिया गया है। तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. धीरेंद्र पाल ने उपकरण की तकनीकी संरचना और कार्यक्षमता को सुदृढ़ किया, जबकि विद्युत अभियांत्रिकी विभाग की सह-प्राध्यापक डॉ. रमा शुक्ला ने बहुविषयक तकनीकी समन्वय में महत्वपूर्ण योगदान दिया। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तकनीक के लिए उपयोगिता पेटेंट एवं अभिकल्प पेटेंट—दोनों के लिए आवेदन किया गया है, जिनमें से अभिकल्प पेटेंट को अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, जबकि उपयोगिता पेटेंट की प्रक्रिया प्रगतिशील अवस्था में है।
इस उपकरण से उत्पादित हाइड्रोजन ईंधन के उपयोग द्वारा हाइड्रोजन-आधारित प्रयोगशाला तथा घरेलू ज्वलन उपकरण विकसित करने पर भी कार्य चल रहा है, जो भविष्य में परंपरागत ईंधनों का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प सिद्ध हो सकता है।
प्रो- चांसलर अनंत कुमार सोनी ने कहा कि यह उपलब्धि एकेएस विश्वविद्यालय की अनुसंधान-प्रधान दृष्टि, नवाचार क्षमता तथा हरित प्रौद्योगिकी के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करती है। यह कार्य आत्मनिर्भर भारत, राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा अभियान तथा सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में एक ठोस और दूरगामी कदम है।
विश्वविद्यालय समुदाय ने इस अंतरराष्ट्रीय मान्यता को भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक बताते हुए पूरी टीम को शुभकामनाएँ दीं और भविष्य में और भी वैश्विक नवाचारों की अपेक्षा व्यक्त की।
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