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दीनदयाल शोध संस्थान एवं संस्कार भारती के तत्वावधान में संघ गंगा के तीन भगीरथ’ नाटक का हुआ मंचनसंघ की सौ वर्ष की यात्रा को दर्शकों के सामने किया गया प्रस्तुत, नागपुर से आए 40 कलाकारों ने दी प्रस्तुतिदीनदयाल परिसर के विवेकानन्द सभागार में हिंदू सम्मेलन आयोजित

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चित्रकूट- दीनदयाल शोध संस्थान एवं संस्कार भारती चित्रकूट के संयुक्त तत्वावधान में तत्वावधान में जिला ऑडिटोरियम चित्रकूट में ‘संघ गंगा के तीन भगीरथ’ नाटक का मंचन नागपुर से आए लगभग 40 कलाकारों ने यह प्रस्तुति दी। इस नाटक के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्ष की यात्रा को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया गया। नाटक में संघ के प्रथम तीन सरसंघचालकों डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, माधव सदाशिवराव गोलवलकर (गुरुजी) और मधुकर दत्तात्रेय देवरस के जीवन, विचारों, संघर्षों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को दर्शाया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सम्मानित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर भैरव प्रसाद मिश्र पूर्व सांसद, चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय पूर्वमंत्री यूपी,आनन्द शुक्ल पूर्व विधायक, महेंद्र कोटार्य जिलाध्यक्ष भाजपा चित्रकूट, चंद्रप्रकाश खरे पूर्व जिलाध्यक्ष, जगदीश गौतम, ए के एस विश्वविद्यालय रीवा एवं महात्मा गाँधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु व गायत्री शक्ति पीठ के डॉ रामनारायण त्रिपाठी के अतिरिक्त चित्रकूट के समस्त संगठनों के पदाधिकारी, स्वयंसेवकों के साथ आम जनमानस की बहुत बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। सभी सम्मानित कलाकारों का अभिनन्दन दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, प्रधान सचिव निखिल मुण्डले, कोषाध्यक्ष वसन्त पंडित एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिताभ वशिष्ठ ने किया।

नाटक की शुरुआत केशव के ऋग्वेद शिक्षक वझे गुरुजी “नानाजी वझे” के साथ होती है, जिसमें बालक केशव की राष्ट्रभक्ति और छत्रपति शिवाजी के आदर्शों से प्रभावित व्यक्तित्व का चित्रण किया गया। इसमें केशव द्वारा कलकत्ता जाकर डॉक्टर बनने और फिर राष्ट्रसेवा के लिए स्वयं को समर्पित करने का प्रसंग भी शामिल था। संघ की स्थापना का संकल्प, संगठन विस्तार की योजना और महात्मा गांधी से डॉ. हेडगेवार की भेंट के प्रसंग भी दिखाए गए।गुरुजी के जीवन प्रसंगों में अखंडानंद के साथ उनका प्रवास, नागपुर लौटना, संघ का दायित्व संभालना और उनका अंतिम भाषण शामिल था। सरदार वल्लभभाई पटेल और गुरुजी के बीच संवाद, कश्मीर का भारत में विलय और संघ पर लगे प्रतिबंध जैसे ऐतिहासिक प्रसंगों को भी मंचित किया गया।

बालासाहेब देवरस के रूप में नेतृत्व हस्तांतरण, आपातकाल के दौरान संघर्ष और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े संकेतों को नाटक में प्रस्तुत किया गया। इस नाटक का लेखन श्रीधर गाडगे ने किया, जबकि निर्देशन संजय पेंडसे और निर्माण सारिका पेंडसे का रहा। अभिनय में मनीष ऊर्दक ने डॉ. हेडगेवार, रमण सेनाड ने गुरुजी और यशवंत चोपड़े ने बालासाहेब देवरस की भूमिका निभाई।



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष के अन्तर्गत ही रविवार को दीनदयाल परिसर के विवेकानन्द सभागार में हिंदू सम्मेलन आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ कन्या एवं तुलसी पूजन के साथ किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संपूर्ण हिंदू समाज को जाति, वर्ग और भाषा के भेदभाव से ऊपर उठाकर एक सूत्र में जोड़ना, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना तथा राष्ट्र चेतना को मजबूत करना है। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ये सम्मेलन हिंदू धर्म का विस्तार, पंच परिवर्तन (कुटुंब प्रबोधन, समरसता, पर्यावरण, स्वदेशी, नागरिक कर्तव्य) और हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए आयोजित किया जा रहा है।

मुख्यवक्ता के अपने उद्बोधन में सन्त सीताराम शरण महाराज ने कहा कि हम सभी बन्धु/ भगिनी माँ भारती की संतान हैं हमारे लिए सनातन सँस्कृति, सभ्यता एवं राष्ट्र प्रथम होना चाहिए सभी से आग्रह है कि वे अपनी बेटियों को परी नही शेरनी बनाएं जिससे कोई भी उनका शोषण न कर सके। हमारा उद्देश्य जाति-भेद को दूर कर हिंदू समाज को संगठित करते हुए
पंच परिवर्तन के लिए जागरूक करना एवं सांस्कृतिक और राष्ट्र चेतना के अंतर्गत सनातन मूल्यों, परंपराओं और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए समाज को जागृत करना। उक्त कार्यक्रम में सुरेन्द्रपाल ग्रामोदय विद्यालय, रामनाथ आश्रमशाला, कृष्णा देवी वनवासी विद्यालय , सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट, महात्मा गाँधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय के छात्र / छात्राओं द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए।

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