“परंपरा का सम्मान vs अपमान की सच्चाई: एक ही शंकराचार्य, दो अलग-अलग तस्वीरें.
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🔴 🌟 “परंपरा का सम्मान vs अपमान की सच्चाई: एक ही शंकराचार्य, दो अलग-अलग तस्वीरें..! शंकराचार्य जी अपने सिंहासन पर विराजमान होकर गंगा स्नान करने क्यों जा रहे थे..?” 🌟🔴
एक तरफ “13 जुलाई 2024” – मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की भव्य शादी में “शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को माला पहनाकर आशीर्वाद दे रहे हैं। 🙏✨
लेकिन ध्यान दें: अंबानी परिवार के आलीशान घर में भी शंकराचार्य जी अपने पवित्र सिंहासन पर विराजमान हैं! आप क्या सोच रहे हैं कि वहाँ आरामदायक सोफ़े या कुर्सियाँ नहीं थीं? 🤔
“नहीं, बात परंपरा की है!” शंकराचार्यों की सदियों पुरानी रिवायतें ऐसी हैं कि उनके रथ, सिंहासन और डोली हमेशा साथ चलते हैं। ये सम्मान का प्रतीक हैं।
याद कीजिए प्रयागराज का महाकुंभ – दुनिया का सबसे बड़ा मेला! वहाँ करोड़ों की भीड़ में भी सभी शंकराचार्य अपने रथ पर सवार होकर संगम स्नान करने पहुँचे, बिना किसी रुकावट के। 🚩🛕
अंबानी के घर की यह तस्वीर बताती है कि सच्ची परंपराएँ कभी नहीं झुकतीं, चाहे जगह कितनी भी बड़ी क्यों न हो! 💪🇮🇳
लेकिन दूसरी तरफ… “18 जनवरी 2026” – प्रयागराज माघ मेला, मौनी अमावस्या का सबसे पावन दिन! 😢
वही शंकराचार्य जी अपनी पवित्र पालकी (सिंहासन) पर विराजमान होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे… लेकिन “योगी सरकार की पुलिस” ने रोक दिया!
शिष्यों से कहा – पैदल चलो!
जब सदियों पुरानी परंपरा का हवाला दिया, तो क्या हुआ?
धक्का-मुक्की… मारपीट… एक बुजुर्ग शिष्य को “बाल (चोटी) पकड़कर घसीटा”, चौकी में ले जाकर “बेरहमी से पीटा” गया – मुक्के, लातें… कई शिष्यों को हिरासत में लिया!
पालकी खींच ली गई, छत्र तक टूट गया… और सबसे दर्दनाक – ” वो पवित्र गंगा स्नान भी नहीं कर पाए!” 💔
शंकराचार्य जी धरने पर बैठ गए, अन्न-जल त्यागकर… क्योंकि आस्था का अपमान सहन नहीं होता!
“शंकराचार्य जी हमेशा धर्म और सनातन परंपरा की रक्षा के लिए बिना डरे बोलते रहे हैं फिर चाहे सत्ता में कोई भी सरकार रही हो!” 🔥
🚩 काशी का दर्दनाक सच: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी ने दावा किया – “काशी में 150 मंदिर तोड़ दिए गए!” 😡 क्या विकास के नाम पर सनातन की जड़ें काटी जा रही हैं? 2018 से ही उन्होंने योगी सरकार पर आरोप लगाया कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बहाने प्राचीन मंदिरों, मूर्तियों और धरोहरों को नष्ट किया जा रहा है। मोदी-योगी को “हिंदू विरोधी” तक कहा!
🐄 गौ-हत्या में बीजेपी की साठगांठ: शंकराचार्य जी ने बार-बार सवाल उठाए –
- सितंबर 2024: मोदी को कोसा कि 10 सालों में गौ-हत्या पर रोक क्यों नहीं लगी? कहा, “PM और राष्ट्रपति हिंदू नहीं, वरना इस्तीफा दे देते!”
- फरवरी 2025: सरकार को 33 दिन का अल्टीमेटम – गाय को “राष्ट्रमाता” घोषित करो, वरना आंदोलन!
- मार्च 2025: दिल्ली में गौ-रक्षा धरने की अनुमति न देने पर सरकार की “दोगली नीति” पर हमला।
- सितंबर 2025: बीजेपी पर आरोप – हिंदू वोटों से सत्ता, लेकिन गौ-मांस निर्यात बढ़ा, बीफ निर्यात में उत्तरप्रदेश नंबर वन! “80,000 गौ रोज कट रही हैं, क्या ये है गौ-माता की रक्षा?”
शंकराचार्य जी ने हमेशा धर्म और परंपरा की रक्षा की बात की। मोदी-योगी सरकार पर सवाल उठाए – कुम्भ में लाशें बहना, महाकुंभ स्टैंपीड पर योगी का इस्तीफा मांगना (2025)।
क्या प्रयागराज में उन्हें गंगा स्नान से रोकना, शिष्यों को पीटना, अपमान करना – ये सब उनकी आवाज दबाने की साजिश है? बदले की कार्रवाई है? क्या सनातन परंपरा और गौ-माता की रक्षा के लिए आवाज उठाना अपराध है?💔
शंकराचार्य जी की आवाज दबाने वाले खुद को हिंदुत्व का ठेकेदार कहते हैं?
ये दोहरी बातें हिंदू समाज के लिए सवाल हैं – सच्चा सम्मान कहाँ है?
सनातनियों जागो! कबतक BJP के राजनीतिक हिन्दू बनकर सनातन धर्म और अपने शंकराचार्य का अपमान सहते रहोगे? 🙏
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रिपोर्टर -दिपक यादव
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