ए.के.एस. यूनिवर्सिटी के माइनिंग स्टूडेंट गए: राजा बाबा वॉटरफॉल परस्मानिया बना ज्ञान, प्रकृति और आनंद की जीवंत पाठशाला।
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सतना। प्रकृति जब स्वयं शिक्षक बन जाए और पहाड़, जलधारा व शिलाएँ पाठ्यक्रम—तो शिक्षा केवल अध्ययन नहीं, अनुभूति बन जाती है। परस्मानिया स्थित राजा बाबा वॉटरफॉल में ऐसा ही दृश्य तब देखने को मिला, जब ए.के.एस. यूनिवर्सिटी के माइनिंग विभाग के फाइनल ईयर स्टूडेंट्स एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण पर पहुँचे।
घने जंगलों के बीच ऊँचाई से गिरता जलप्रपात, चट्टानों पर उकेरा गया समय का इतिहास, हरियाली से भरी घाटियाँ और जल की अनवरत धारा—राजा बाबा वॉटरफॉल की यह संपूर्ण विविधता विद्यार्थियों के लिए किसी खुली प्रयोगशाला से कम नहीं थी। यहाँ भू-आकृतिक संरचनाएँ, शैल-परतों की बनावट और जल प्रवाह का प्रभाव सैद्धांतिक ज्ञान को सजीव रूप में सामने ला रहा था।
*प्रोफेसर अनिल मित्तल की दृष्टि*
इस भ्रमण का नेतृत्व कर रहे सीनियर फैकल्टी प्रोफेसर अनिल मित्तल ने इसे “ज्ञान को महसूस करने का अवसर” बताया। उनके शब्दों में, “राजा बाबा वॉटरफॉल जैसे स्थल छात्रों को किताबों से बाहर निकालकर प्रकृति की गोद में ले आते हैं। यहाँ शिलाओं की परतें, अपक्षय की प्रक्रिया और जल का भूवैज्ञानिक प्रभाव प्रत्यक्ष दिखाई देता है। सुरक्षित रास्ते, बैठने की व्यवस्था और अन्य फैसिलिटीज ने अध्ययन को सहज और आनंददायक बना दिया।”
*विद्यार्थियों की खुशी और अनुभव*
विद्यार्थियों के लिए यह यात्रा पढ़ाई से कहीं आगे की अनुभूति थी। किसी ने जलधारा के पास बैठकर प्रवाह को समझा, तो किसी ने चट्टानों को छूकर उनमें छिपे भूवैज्ञानिक इतिहास को महसूस किया। समूह चर्चा, फील्ड नोट्स, फोटोग्राफी और प्रकृति के बीच बिताए गए पल छात्रों के चेहरों पर स्पष्ट खुशी बिखेर रहे थे। सुविधाओं के कारण पूरा भ्रमण सहज रहा और सीखना उत्सव में बदल गया।
*स्मृतियों में दर्ज एक अनुपम अवसर*
भ्रमण के समापन पर छात्रों ने माना कि यह यात्रा उनके शैक्षणिक जीवन की सबसे यादगार सीखों में से एक रही। शिक्षक का मार्गदर्शन, साथियों के साथ साझा किया गया आनंद और प्रकृति के बीच अर्जित व्यावहारिक ज्ञान—इन सबने राजा बाबा वॉटरफॉल को केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि जीवन भर की सीख देने वाली पाठशाला बना दिया
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