February 8, 2026

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ए.के.एस. विश्वविद्यालय के एमएससी केमिस्ट्री छात्रों का एसीसी समूह की सहयोगी कंपनी में चयन।

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सतना। उच्च शिक्षा को उद्योग से जोड़ने की दिशा में ए के एस यूनिवर्सिटी ने एक और उपलब्धि दर्ज की है। विश्वविद्यालय के एमएससी केमिस्ट्री पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों—अंकित कुमार तिवारी, रविंद्र कुमार सोनी, रामप्रकाश कुशवाहा और सर्वेश समदड़िया—का चयन  में ट्रेनी केमिस्ट पद के लिए हुआ है। चयनित छात्रों की तैनाती मारवाड़ मुंडवा, राजस्थान में होगी।
कंपनी प्रोफाइल: ए डी एस लैब्टेक
देश की अग्रणी सीमेंट निर्माता ए सी सी लिमिटेड  की सहयोगी इकाई है। कंपनी सीमेंट उद्योग के लिए उन्नत प्रयोगशाला परीक्षण, गुणवत्ता आश्वासन और प्रक्रिया विश्लेषण सेवाओं में विशेषज्ञता रखती है। सख़्त गुणवत्ता मानक, आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित मानव संसाधन इसकी पहचान हैं।
वर्क प्रोफाइल (ट्रेनी केमिस्ट):
ट्रेनी केमिस्ट के रूप में चयनित विद्यार्थी कच्चे माल और तैयार उत्पादों की केमिकल एनालिसिस, सैंपल टेस्टिंग, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रक्रिया निगरानी, प्रयोगशाला सुरक्षा मानकों का अनुपालन तथा रिपोर्टिंग जैसे दायित्व निभाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें औद्योगिक प्रक्रियाओं की व्यावहारिक समझ और आधुनिक लैब तकनीकों पर काम करने का अवसर मिलेगा।
कोर्स प्रोफाइल (एमएससी केमिस्ट्री):
ए.के.एस. विश्वविद्यालय का एमएससी केमिस्ट्री कार्यक्रम मजबूत सैद्धांतिक आधार के साथ प्रयोगात्मक दक्षता पर केंद्रित है। एनालिटिकल केमिस्ट्री, इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री, इंस्ट्रूमेंटेशन और रिसर्च मेथडोलॉजी जैसे विषय छात्रों को उद्योग और अनुसंधान—दोनों के लिए तैयार करते हैं।
ए.के.एस. विश्वविद्यालय की विशेषताएं:
विश्वविद्यालय उद्योग–उन्मुख पाठ्यक्रम, सुसज्जित प्रयोगशालाएं, अनुभवी फैकल्टी, रिसर्च–फोकस्ड वातावरण और सक्रिय ट्रेनिंग व प्लेसमेंट सेल के लिए जाना जाता है। निरंतर इंडस्ट्री इंटरफेस, इंटर्नशिप और स्किल–डेवलपमेंट पहलें छात्रों की रोजगार क्षमता को सशक्त बनाती हैं।
इस सफलता पर विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर अनंत कुमार सोनी ने चयनित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि गुणवत्ता–आधारित शिक्षा और उद्योग साझेदारी का परिणाम है। ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट हेड बलिन्द विश्वकर्मा, टीम के प्रफुल्ल गौतम और मनोज सिंह ने भी छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं, डीन (विज्ञान संकाय) डॉ. शैलेंद्र यादव ने इसे विभागीय मार्गदर्शन और छात्रों की मेहनत का फल बताया।

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