नगर पंचायत में फर्जी बिल–भुगतान का जाल ? *आर टी आई में जानकारी देने से, अधिकारियों के फूल रहे हाथ-पांव*
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धरमजयगढ़ नगर पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर फर्जी बिलों से भुगतान किए जाने का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। आरोप है कि कई कार्यों में ज़मीनी स्तर पर काम हुए बिना ही कागज़ों में बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान कर दिया गया, जबकि वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल उलट है।
चौंकाने वाली बात यह है कि नगर पंचायत में बार-बार “बिल गुम हो जाने” का हवाला देकर एक ही कार्य के लिए दोबारा-तिबारा बिल मंगवाए जाते हैं। इस प्रक्रिया से जहां कार्य करने वाले वेंडर लगातार परेशान हैं, वहीं ऐसे बिलों के दुरुपयोग और एक ही काम के नाम पर दोहरी या फर्जी भुगतान की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। बिलों के रख-रखाव और रिकॉर्ड संधारण में भारी लापरवाही साफ दिखाई दे रही है।
जैसे-जैसे इस पूरे भुगतान तंत्र पर सवाल उठे और सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगी गई, वैसे-वैसे अधिकारियों के हाथ-पांव फूलते नजर आ रहे हैं। समय-सीमा में जानकारी देने के बजाय टालमटोल, अधूरी सूचनाएं और “रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं” जैसे जवाब सामने आ रहे हैं, जो संदेह को और गहरा करते हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में माप पुस्तिका , कार्य स्वीकृति और वास्तविक कार्य के बीच गंभीर अंतर है, इसके बावजूद भुगतान स्वीकृत होना जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि योजनाबद्ध वित्तीय अनियमितता का मामला प्रतीत होता है। अब देखना यह है कि प्रशासन पारदर्शिता दिखाता है या आर टी आई के सवालों से यूं ही बचता रहेगा।
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