पंचायतों पर माफिया की पकड़!
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मुदित श्रीवास्तव के नाम से जुड़ा भुगतान घोटाला, 640 रुपये किलो में दिखाई गई सरिया**

अनूपपुर जिले में पंचायत स्तर पर हो रहे फर्जीवाड़ों के पीछे जिस नाम की सबसे अधिक चर्चा है, वह है मुदित श्रीवास्तव। ग्राम पंचायत ओढेरा में सामने आए ताज़ा मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पंचायतें भी अब माफिया के नियंत्रण में जा चुकी हैं। आरोप है कि मुदित श्रीवास्तव से जुड़ी फर्मों ने बिलिंग में भारी हेरफेर कर सरकारी खजाने से लाखों रुपये निकाल लिए।
मुदित श्रीवास्तव का ‘बिलिंग मॉडल’
जानकारी के अनुसार, मुदित श्रीवास्तव की कार्यशैली में एक खास पैटर्न सामने आया है।
सामग्री की दर कॉलम में सामान्य बाजार मूल्य दर्ज किया जाता है, लेकिन कुल भुगतान की राशि जानबूझकर कई गुना बढ़ा दी जाती है। इसी तकनीकी चाल का फायदा उठाकर पंचायत से भुगतान आहरित कर लिया गया।
640 रुपये किलो सरिया—नाम सीधे मुदित श्रीवास्तव से जुड़ा
ग्राम ओढेरा में जय माता दी स्टोन क्रेशर (वेंडर आईडी: 2552284) के नाम से लगाए गए बिल सीधे तौर पर मुदित श्रीवास्तव से जुड़े बताए जा रहे हैं।


बिल क्रमांक 68 (11.02.2021)
बिल क्रमांक 69 से 73 (20.12.2021)


बिल क्रमांक 74 (30.12.2021)
इन बिलों में सरिया की दर 64 रुपये प्रति किलो दिखाई गई, लेकिन 10 किलो सरिया के बदले 6,400 रुपये का भुगतान आहरित किया गया।
इस हिसाब से कागजों में सरिया की कीमत 640 रुपये प्रति किलो बैठती है—जो बाजार भाव से कई गुना अधिक है।
लीज पिट और गिट्टी भुगतान में भी श्रीवास्तव का नेटवर्क
आरोप है कि मुदित श्रीवास्तव ने केवल सरिया तक ही सीमित न रहते हुए लीज पिट और गिट्टी परिवहन के नाम पर भी फर्जी भुगतान कराया।
सूत्रों के मुताबिक, मात्रा बढ़ाकर दिखाई गई और रॉयल्टी चोरी के बावजूद पूरा भुगतान निकाल लिया गया।
रॉयल्टी चोरी के आरोप
बताया जा रहा है कि श्रीवास्तव से जुड़ी फर्मों द्वारा गिट्टी परिवहन में लगातार रॉयल्टी चोरी की गई, लेकिन पंचायत स्तर पर न तो रॉयल्टी काटी गई और न ही कोई आपत्ति दर्ज की गई।
पंचायत से प्रशासन तक—सब मौन क्यों?
मुदित श्रीवास्तव का नाम पहले भी खनन और पंचायत भुगतानों को लेकर विवादों में सामने आ चुका है। इसके बावजूद अब तक किसी ठोस कार्रवाई का न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कार्रवाई की मांग
स्थानीय स्तर पर मांग तेज हो रही है कि—
मुदित श्रीवास्तव से जुड़ी सभी फर्मों के पंचायत भुगतानों की जांच हो
संबंधित वेंडर आईडी को ब्लैकलिस्ट किया जाए
फर्जी भुगतानों की पूरी राशि वसूली जाए
भविष्य में मुदित श्रीवास्तव या उससे जुड़ी किसी भी फर्म को पंचायत कार्य न दिए जाएँ
नई फर्म, वही पुराना खेल?
सूत्रों का यह भी दावा है कि मुदित श्रीवास्तव नई फर्म के नाम पर दोबारा पंचायतों से भुगतान लेने की तैयारी में है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकारी धन की लूट का यह सिलसिला थमना मुश्किल होगा।
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