वृक्षारोपण के नाम पर लाखों का खेल , ज़मीन पर पेड़ों के नाम पर सन्नाटा
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धरमजयगढ़ विकासखंड में मनरेगा के अंतर्गत कराए गए वृक्षारोपण कार्यों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनरेगा की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रिपोर्ट (2025–26) के अनुसार, दर्जनों ग्राम पंचायतों में स्कूल परिसरों, सड़कों के किनारे और पंचायत भूमि पर वृक्षारोपण कार्य पूर्ण दिखाए गए हैं, लेकिन इन कार्यों की प्रकृति और खर्च का पैटर्न संदेह के घेरे में है।
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश कार्य सितंबर से नवंबर 2025 के बीच लगभग एक ही समयावधि में पूरे दिखाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इन कार्यों में श्रम प्रधान योजना होने के बावजूद सामग्री मद पर भारी खर्च दर्शाया गया है। कई प्रविष्टियों में श्रम व्यय अपेक्षाकृत कम और सामग्री व्यय असामान्य रूप से अधिक है, जो मनरेगा अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है।
सूत्रों के अनुसार, जिन स्थानों पर वृक्षारोपण पूर्ण दिखाया गया है, वहाँ या तो पौधे मौजूद नहीं हैं या फिर उनकी संख्या, प्रजाति और संरक्षण व्यवस्था सवालों के घेरे में है। कई कार्यों में एक जैसी लागत, एक जैसी प्रकृति और एक जैसी पूर्णता तिथि यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं टेम्पलेट के आधार पर एंट्री कर भुगतान निकालने का खेल तो नहीं खेला गया।
जानकारों का मानना है कि यदि इन कार्यों का भौतिक सत्यापन, जियो-टैग फोटो, मस्टर रोल और सामग्री खरीदी के बिलों की गहन जांच कराई जाए, तो बड़ा खुलासा हो सकता है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि वृक्षारोपण को कैंपा, ए एन आर या अन्य मदों से जोड़कर दोहरी फंडिंग की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
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