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जान जोखिम में डालकर पहरा, हाथी प्रभावित क्षेत्र में मचान से निगरानी

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धरमजयगढ़

रायगढ़ जिले के अंतर्गत छाल  टी एस एस के धान उपार्जन केंद्र कटाईपाली-सी में एक ऐसा दृश्य सामने आया , जिसे देखकर एकबारगी यकीन करना मुश्किल हो गया । सुविधाओं के घोर अभाव से जूझ रहे इस खरीदी केंद्र में कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर धान की रखवाली करने को मजबूर हैं। हाथी प्रभावित क्षेत्र होने के कारण कर्मचारियों को रात के समय पेड़ों पर मचान बनाकर पहरा देना पड़ता है, ताकि जान-माल की सुरक्षा हो सके।
मंडी प्रबंधक ठंडा राम बेहरा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि धान खरीदी केंद्र में न तो कोई सुविधाजनक कार्यालय है, न शेड, न पक्का फर्श और न ही चारदीवारी। खुले मैदान में धान का भंडारण किया जा रहा है, जहां हर वक्त हाथियों के हमले का खतरा बना रहता है। केंद्र के चारों ओर केवल तार का घेरा लगाया गया है, जो हाथी जैसे विशालकाय वन्यजीव के सामने पूरी तरह नाकाफी साबित हो रहा है।
प्रबंधक ने बताया कि हाथी कई बार मंडी परिसर में घुसकर धान खा जाते हैं, जिससे भारी नुकसान होता है, लेकिन इस क्षति की भरपाई शासन की ओर से नहीं की जाती। इससे न केवल सरकारी संपत्ति का नुकसान होता है, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा भी गंभीर सवालों के घेरे में है।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि रात के समय मंडी प्रबंधक सहित कर्मचारी मंडी के भीतर पेड़ों पर अस्थायी मचान बनाकर पहरा देते हैं। यह व्यवस्था किसी आपात स्थिति में बड़े हादसे को न्योता दे सकती है, लेकिन इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
कटाईपाली-सी धान उपार्जन केंद्र के कर्मचारी और प्रबंधन लंबे समय से शासन-प्रशासन से बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपेक्षा कर रहे हैं। सवाल देखना यह है कि किसानों की उपज और कर्मचारियों की जान की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार तंत्र आखिर कब जागेगा, या किसी बड़ी घटना के बाद ही हालात सुधरेंगे?

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