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March 3, 2026

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कोयले की परतों में दबता जंगल ,  वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन पर बड़ा सवाल !

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धरमजयगढ़ – पुरुँगा, तेन्दुमुड़ी (कोकदार)और साम्हरसिंघा में प्रस्तावित मेसर्स अंबुजा सीमेंट  लिमिटेड के कोल ब्लॉक को लेकर अब एक और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, इस परियोजना के 20 किलोमीटर की परिधि में पहले से कई कोल ब्लॉक स्थित अथवा प्रस्तावित हैं। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इस पूरे क्षेत्र के वन्यजीवों का व्यवस्थापन आखिर कैसे और कहाँ किया जाएगा?

दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि वन्यजीव प्रबंधन योजना परियोजना को मंजूरी देने की एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य शर्त है। इस शर्त के पूर्ण और संतोषजनक रूप से पूरा होने पर ही परियोजना को स्वीकृति दी जा सकती है। बावजूद इसके, उपलब्ध अभिलेखों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वन्यजीवों के प्रबंधन की ठोस, स्थान-आधारित और व्यवहारिक योजना आखिर है क्या। 
स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब एक ही क्षेत्र में कई कोल ब्लॉकों की मौजूदगी के कारण हाथियों सहित अन्य वन्य जीवों और पक्षियों के पारंपरिक आवास, विचरण मार्ग और भोजन क्षेत्र पहले से ही दबाव में हैं। सवाल यह है कि जब आसपास की वन भूमि पहले ही परियोजनाओं से घिरी हुई है, तो विस्थापित या प्रभावित वन्यजीवों को किस दिशा में, किस क्षेत्र में और किस व्यवस्था के तहत स्थानांतरित या संरक्षित किया जाएगा? 
हालांकि कंपनी की ओर से हाथियों सहित अन्य जीवों और पक्षियों के व्यवस्थापन/प्रबंधन की बात कही जा रही है, लेकिन यह बयान अब तक सिर्फ आश्वासन के स्तर पर ही दिखाई देता है। दस्तावेजों में न तो स्पष्ट स्थल चिन्हित हैं, न ही यह बताया गया है कि कई परियोजनाओं से घिरे इस क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए अलग और सुरक्षित प्रबंधन क्षेत्र कहां उपलब्ध है।
पर्यावरण और वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बिना स्पष्ट, व्यावहारिक और क्षेत्रीय वन्यजीव प्रबंधन योजना के परियोजना को आगे बढ़ाना न सिर्फ शर्तों का उल्लंघन होगा, बल्कि यह मानव–वन्यजीव संघर्ष को भी बढ़ा सकता है। विशेष रूप से हाथियों जैसे संवेदनशील और भ्रमणशील जीवों के लिए यह स्थिति अत्यंत खतरनाक साबित हो सकती है।
अब सवाल और भी तीखा हो गया है कि वन्यजीव प्रबंधन की शर्त पूरी हो गई? पूरी कर ली जायेगी, यदि हाँ तो क्या वन्यजीव संरक्षण /व्यवस्थापन की कार्य योजना बनी है, और यदि नहीं तो जब मंजूरी की शर्त ही पूरी नहीं की गई, तो परियोजना को आगे बढ़ाने का आधार क्या है?

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