धरमजयगढ़ में कागज़ों पर दौड़ रही ‘टॉय ट्रेन’, विकास की पटरियाँ अब फाइलों में बिछीं ?
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धरमजयगढ़ में स्वीकृत टॉय ट्रेन परियोजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। 14 मार्च 2024 को जिला खनिज न्यास निधि मद से स्वीकृत इस योजना की लागत लगभग पाँच लाख रुपये निर्धारित की गई थी, जिसमें से ढाई लाख रुपये तक का व्यय भी दर्शा दिया गया है। परियोजना के विवरण में यह उल्लेख किया गया है कि “पहले से निर्मित टॉय ट्रेन परिसर में नई टॉय ट्रेन उपलब्ध कराई जानी है”, परंतु धरमजयगढ़ में अब तक किसी भी प्रकार का टॉय ट्रेन परिसर मौजूद नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि न तो यहाँ कोई ट्रेन दिखी है और न ही कोई परिसर, फिर भी कागज़ों में परियोजना पूरी कर दी गई है। नागरिकों का मानना है कि धरमजयगढ़ में विकास अब पटरियों पर नहीं, बल्कि फाइलों के पन्नों पर दौड़ रहा है। जनप्रतिनिधि भी मानते हैं कि यदि यह परियोजना वास्तव में स्वीकृत हुई है तो उसका स्थल और संरचना स्पष्ट रूप से जनता के सामने दिखाई देनी चाहिए।
जानकारी के अनुसार इस परियोजना की स्वीकृति तिथि 14 मार्च 2024 है और कुल पाँच लाख रुपये की राशि डीएमएफ मद से स्वीकृत की गई थी। इसमें लगभग ढाई लाख रुपये खर्च दिखाए जा चुके हैं, पर धरमजयगढ़ में किसी भी टॉय ट्रेन या उससे संबंधित अवसंरचना का नामोनिशान नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यहाँ बच्चों के मनोरंजन के लिए ऐसी कोई सुविधा पहले भी नहीं रही और अब जो कागज़ों में दिखाई जा रही है, वह शायद “कागज़ी ट्रेन” ही है जो फाइलों की पटरियों पर सरपट दौड़ रही है।
इस योजना की स्वतंत्र जाँच की जानी चाहिये ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परियोजना वास्तव में क्रियान्वित हुई या केवल कागज़ों तक सीमित रह गई। उनका कहना है कि अगर ट्रेन और परिसर का कोई भौतिक प्रमाण नहीं है, तो भुगतान और व्यय की पूरी प्रक्रिया की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
धरमजयगढ़ की यह टॉय ट्रेन परियोजना अब एक उदाहरण बन गई है कि कैसे विकास योजनाओं की गति कभी-कभी केवल रिपोर्टों और आंकड़ों तक सिमट जाती है। ज़मीन पर न तो कोई पटरी है, न कोई सीटी, लेकिन कागज़ों में ट्रेन सरपट दौड़ रही है!
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