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July 18, 2026

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एकेएस वि.वि.में डॉ.विश्वास चौहान का जम्मू कश्मीर और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के संदर्भ में भारतीय संसद का संकल्प विषय पर व्याख्यान।     

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सतना। 5 मार्च। मंगलवार। एकेएस विश्वविद्यालय के विधि संकाय के स्टूडेंट्स के लिए डॉ.विश्वास चौहान का व्याख्यान आयोजित हुआ। डॉ विश्वास चौहान मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के प्रशासनिक सदस्य एवं विधि विशेषज्ञ ने विश्वविद्यालय के केंद्रीय सभागार में कहा कि संविधान सभा को प्रभावी बनाने के लिए अनुच्छेद 370 ड्राफ्ट आर्ट.306A पेश किया। इस अनुच्छेद का शीर्षक है ‘जम्मू और कश्मीर राज्य से संबंधित अस्थायी प्रावधान। इसका उद्देश्य जम्मू और कश्मीर को एक स्वतंत्र रियासत से भारत के एक लोकतांत्रिक राज्य में बदलने में सक्षम बनाना था।

इस अनुच्छेद ने तीन काम किये इसने जम्मू-कश्मीर के लिए कानून बनाने की भारतीय संसद की शक्ति को इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन यानी विलय पत्र में उल्लिखित तीन विषयों रक्षा, विदेशी मामले और संचार तक सीमित कर दिया। इसमें कहा गया है कि अनुच्छेद एक को छोड़कर भारत का संविधान जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता। अनुच्छेद एक में कहा गया है कि भारत राज्यों का एक संघ है। इसमें कहा गया था कि इस अनुच्छेद में संशोधन केवल जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा की सहमति से राष्ट्रपति द्वारा किया जा सकता है। भले ही राज्य के संविधान के अस्तित्व में आने के बाद जम्मू-कश्मीर की संविधान सभा का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, लेकिन अनुच्छेद 370 में संशोधन करने का अधिकार केवल संविधान सभा को दिया गया था न कि इसकी विधान सभा को इसलिए इस संविधान सभा का उद्देश्य अनुच्छेद 370 के भाग्य का हमेशा के लिए फैसला करना था।


जम्मू और कश्मीर की संविधान सभा जम्मू कश्मीर और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के परिपेक्ष में भारतीय संसद का संकल्प हम सभी के लिए नजीर है। उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोग के प्रत्येक पाठ्यक्रम में 370 एवं जम्मू कश्मीर के ऊपर एक प्रश्न अनिवार्य रूप से आने वाला है। जम्मू कश्मीर इंटरनेशनल पॉलिटिकल लैब के रूप में एस्टेब्लिश हुई है जम्मू कश्मीर का हिस्सा आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से आर्थिक,सांस्कृतिक,भौगोलिक इन सारी दृष्टियों से बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बनने वाला है। जम्मू कश्मीर का  इतिहास और उसका विकास क्रम उन्होंने समझाया। उन्होंने कल्हण की राजतरंगिणी का उल्लेख किया। यूनाइटेड नेशंस में भारत का जो पक्ष है इस पर उन्होंने प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के अनुसार संसद को जम्मू कश्मीर के बारे में रक्षा विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार था लेकिन किसी अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार को मंजूरी देनी होती थी। अब अक्टूबर 2019 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग केन्द्र शासित प्रदेश में पुनगठित कर दिया गया। इसके साथ ही केन्द्र सरकार के 170 कानून जो पहले लागू नहीं थे, अब वे इस क्षेत्र में लागू कर दिए गए हैं। यहां के स्थानीय निवासियों और दूसरे राज्यों के नागरिकों के बीच अधिकार अब समान हैं। उन्होंने शारदा पीठ,गिलगिट, बुद्धा,बाल्टिस्तान का महत्व, लेडी फिंगर हिल ,नंगा पर्वत बेस कैंप पर चर्चा की।  ।वह सभागार में उपस्थित छात्रों से संवाद किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा सरस्वती मां की प्रतिमा के समक्ष अक्षत, धूप, दीप के साथ किया गया। विश्वविद्यालय के कुल गीत का गायन हुआ। कार्यक्रम का संचालन डीन लॉ विभाग डॉ. सुधीर जैन ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रोचांसलर अनंत कुमार सोनी, कुलपति प्रो.बी. ए.चोपड़े,प्रो,आर.एस.त्रिपाठी, प्रो.जी.सी मिश्रा,विधि संकाय डीन डॉ.सुधीर कुमार जैन, सहायक प्राध्यापक शशिकांत दुबे,हरिशंकर कोरी, विनय कुमार पाठक ,विधि शम्भरकर,प्रशांत तिवारी तथा आरती विश्वकर्मा के साथ लॉ और ह्यूमैनिटीज के छात्र-छात्राए उपस्थित रहे।

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