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भगवान व गुरुदेव ही कर सकते हैं कष्ट का निवारण : आचार्य मनसुख लाल

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श्रीमद् भागवत कथा में मनाया गया श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव
सतना। लगरगवां में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन बड़ा अखाड़ा मैहर से आए कथा व्यास आचार्य मनसुख लाल गौतम ने विभिन्न प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नीति कहाती है कि जब जीवन में कष्ट आए तो केवल भगवान अथवा गुरु के पास ही जाने से उसका निवारण हो सकता है। उन्होंने कहा कि राजा दशरथ के मन में जब पुत्र की कामना हुई तो उन्हें गुरुदेव की शरण में ही जाना पड़ा। गुरुदेव ने उन्हें इसका रास्ता बताया और Ÿरृंगी मुनि के द्वारा किए गए पुत्र कामेष्ठि यज्ञ से उनके कष्ट का निवारण हुआ। इसलिए संसार के किसी भी व्यक्ति के पास जाने से कष्ट का निवारण नहीं होता क्योंकि मनुष्य खुद ही विभिन्न परेशानियों से जूझता रहता है तो वह फिर वह आपकी समस्या को दूर कैसे कर सकता है।
आचार्य श्री गौतम ने कहा कि भगवान ने संसार को यह शिक्षा देने का प्रयास किया कि इस संसार में मनुष्य से लेकर जीव जंतुओं तक में मेरा ही अंश समाया हुआ है। यही कारण है कि भगवान ने जहां मनुष्य के रूप में अवतार तो लिया साथ ही जीव जंतु के रूप में भी उन्होंने अवतार लेकर अपनी माया को दिखाया है। इसलिए हमें सभी के प्रति आदर व सम्मान रखना चाहिए। कथा के अंत में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दौरान रवि प्रताप सिंह ने वासुदेव एवं बालक सोम के भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप मनमोहक रहा। इस अवसर पर कथा के मुख्य यजमान अभिलेश सिंह परिहार व किरण सिंह ने भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर गुरुदेव सहित सभी आचार्यों का पूजन कर आशीर्वाद लिया।

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