चण्डीपारा में मनरेगा मजदूरी भुगतान पर सवाल: 4 मजदूरों के ₹4,828 अटके, रोजगार सहायक के प्रतिवेदन को बताया भ्रामक! मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायत के बाद भी नहीं मिला भुगतान, मजदूरों ने रोजगार सहायक विष्णु दास पर लगाए गलत जानकारी देने के आरोप!
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जांजगीर-चांपा/पामगढ़, 30 अक्टूबर 2026। ग्राम पंचायत चण्डीपारा में मनरेगा मजदूरी भुगतान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चार मजदूरों की कुल 20 दिनों की मेहनत की ₹4,828 मजदूरी कथित तौर पर चार महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी उनके बैंक खातों में नहीं पहुंची है। मजदूरों का आरोप है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत करने के बावजूद उन्हें अब तक भुगतान नहीं मिला। वहीं, शिकायत के जवाब में जनपद पंचायत पामगढ़ को रोजगार सहायक विष्णु दास द्वारा दिया गया प्रतिवेदन भी विवादों में आ गया है।

20 दिन काम, लेकिन ₹4,828 का भुगतान अब भी लंबित:
मामला जॉब कार्ड क्रमांक CH-14-007-009-001/257 से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, जगदीश रात्रे और उनके परिवार के तीन अन्य सदस्यों ने 25 जून से 30 जून 2026 तक मनरेगा के तहत “महेन्द्र के खेत से बसंत के खेत की ओर बोहा नाला—वाटर कोर्स मरम्मत एवं रखरखाव” कार्य में मजदूरी की थी।
मजदूरों के अनुसार उनका विवरण इस प्रकार है—
- जगदीश रात्रे – 6 दिन – ₹1,448.40
- सीमा बाई (पत्नी) – 6 दिन – ₹1,448.40
- संदीप कुमार (पुत्र) – 5 दिन – ₹1,207.00
- बसंती रात्रे (पत्नी) – 3 दिन – ₹724.20 कुल मजदूरी: 20 दिन – ₹4,828मजदूरों का कहना है कि मस्टर रोल और माप-पुस्तिका में काम एवं उपस्थिति दर्ज होने के बावजूद उन्हें मजदूरी की राशि प्राप्त नहीं हुई है।

3 जुलाई को FTO से भुगतान का दावा, बैंक खातों में राशि नहीं!मजदूरी नहीं मिलने पर पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद जनपद पंचायत पामगढ़ की ओर से रोजगार सहायक विष्णु दास का प्रतिवेदन लेकर जवाब दिया गया कि 3 जुलाई 2026 को ही FTO के माध्यम से भुगतान कर दिया गया है।
लेकिन मजदूरों का कहना है कि ऑनलाइन भुगतान विवरण में राशि क्रेडिट होने की पुष्टि नहीं दिख रही है और 30 अक्टूबर 2026 तक उनके बैंक खातों में मजदूरी का एक भी रुपया जमा नहीं हुआ है।
रोजगार सहायक पर गलत प्रतिवेदन देने का आरोप:
पीड़ित मजदूरों ने रोजगार सहायक विष्णु दास पर जानबूझकर गलत एवं भ्रामक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जब वास्तविक रूप से बैंक खातों में भुगतान नहीं हुआ, तो फिर 3 जुलाई को भुगतान किए जाने की जानकारी किस आधार पर दी गई? मजदूरों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
मजदूरों की मांग—जांच हो, जिम्मेदारी तय हो और मिले मजदूरी:
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि—
- ₹4,828 के कथित लंबित मजदूरी भुगतान की तत्काल जांच कराई जाए।
- FTO, मस्टर रोल और बैंक भुगतान की स्थिति का मिलान कराया जाए।
- रोजगार सहायक विष्णु दास द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन की सत्यता की जांच हो।
- यदि जांच में लापरवाही या गलत जानकारी देना प्रमाणित होता है, तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- मजदूरों की मेहनत की राशि उनके बैंक खातों में शीघ्र जमा कराई जाए। अब देखना होगा कि जनपद पंचायत पामगढ़ और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और चण्डीपारा के इन मजदूरों को उनकी मेहनत की मजदूरी कब तक मिल पाती है।
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