धान खरीदी में फर्जीवाड़े का खेल ! कंचीरा: फर्जी वन अधिकार पट्टे के आधार पर शासकीय धान खरीदी का खुलासा, कलेक्टर के निर्देश पर जाँच शुरू
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धरमजयगढ़ – छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के कापू तहसील अंतर्गत ग्राम कंचीरा से शासकीय भूमि और वन भूमि पर फर्जी तरीके से वन अधिकार पट्टा (Frc) बनवाकर, उस पर अवैध रूप से धान बेचने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में रायगढ़ कलेक्टर के न्यायालय में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें पुख्ता सबूत पेश किए गए हैं कि किस प्रकार कथित ‘छोटे झाड़ के जंगल’ और अकृष्य शासकीय भूमि को निजी पट्टा बताकर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक स्थानीय आवेदक ने कलेक्टर न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर ग्राम कंचीरा स्थित खसरा नंबर 1252, रकबा 1.050 हेक्टेयर भूमि पर कथित रूप से बने एक फर्जी वन अधिकार पट्टे को निरस्त करने की मांग की। आवेदक का आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में यह भूमि स्पष्ट रूप से ‘छोटे झाड़ का जंगल’ और अकृषि शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह स्वयं इस भूमि पर वर्षों से काबिज है और खेती कर रहा है, जिसके लिए उसने वन अधिकार पट्टे हेतु आवेदन भी किया था।

लेकिन, उसे तब हैरानी हुई जब पता चला कि इसी भूमि का एक पट्टा किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर कथित रूप से जारी हो चुका है। आवेदक का दावा है कि कथित पट्टाधारक व्यक्ति गांव का निवासी भी नहीं है और न ही उसका कभी इस भूमि पर कब्जा रहा है। शिकायत में दावा किया गया है कि जारी पट्टा में आलोक पत्नी धनीराम जाति उरांव अंकित है और इस नाम का कोई भी व्यक्ति गांव में नहीं रहता है।

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब किसान आलोक एक्का पिता राजी एक्का द्वारा सहकारी समिति में इसी खसरा का पंजीयन करा धान विक्रय किए जाने के अधिकृत विवरण सामने आए। यह ब्यौरा साबित करता है कि कथित फर्जी पट्टाधारक, आलोक एक्का (पिता राजी एक्का) के नाम पर न केवल किसान कोड (TF4100790101437) जारी है, बल्कि उसने खरीफ वर्ष 2025-26 के लिए इसी विवादित भूमि (खसरा नंबर 1252) को आधार बनाकर धान बेचने हेतु टोकन भी कटाया। दस्तावेज़ों के अनुसार, संबंधित व्यक्ति ने 5 जनवरी 2026 को 40 क्विंटल धान सरकारी समिति में बेचा और उसका भुगतान भी प्राप्त कर लिया। यह सीधे तौर पर सरकारी भूमि के आधार पर अवैध रूप से धान बेचकर शासकीय राशि का गबन करने का मामला प्रतीत होता है।

इस शिकायत और प्रस्तुत दस्तावेज़ों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए, रायगढ़ कलेक्टर ने एक कड़ा राजस्व आदेश (रेवेन्यू ऑर्डर शीट) जारी किया है। कलेक्टर ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं, जिसमें विशेष रूप से चार बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है। जांच में सबसे पहले ग्राम कंचीरा स्थित खसरा नंबर 1252 की वर्तमान राजस्व स्थिति, उसके वास्तविक स्वामित्व और उस पर काबिज व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, कथित तौर पर जारी किए गए वन अधिकार पट्टे की मूल प्रति, संबंधित आदेश और पट्टा जारी करने की पूरी प्रक्रिया का सूक्ष्मता से सत्यापन किया जाएगा ताकि यह पता चल सके कि क्या यह नियमानुसार और विधिवत जारी किया गया था या नहीं। जांच टीम को यह भी पता लगाने के निर्देश हैं कि क्या पट्टा प्राप्त करने के लिए जानबूझकर गलत जानकारी प्रस्तुत की गई और शासन को भ्रमित किया गया।
कलेक्टर ने सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर एक विस्तृत प्रतिवेदन, स्पष्ट अभिमत के साथ, निर्धारित समय सीमा के भीतर अनुविभागीय अधिकारी (रा.) धर्मजयगढ़ के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए। इस खुलासे ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है और यह संदेह गहरा गया है कि क्या इस रैकेट में कुछ स्थानीय अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल हैं। जांच की आंच कई रसूखदारों तक पहुंचने की संभावना है। स्थानीय ग्रामीणों ने इस जांच का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि दोषियों पर कड़ी कार्यवाही होगी और सरकारी भूमि को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जाएगा। यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है कि कैसे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग रोका जाए।
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