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October 30, 2026

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चाल्हा में 8 वन अधिकार पट्टों का विवाद: एसडीएम कोर्ट ने कहा—निरस्तीकरण का अधिकार त्रिस्तरीय वन अधिकार समिति को , शिकायत में पट्टों को बताया गया था फर्जी, अब त्रि-स्तरीय वन अधिकार समिति के समक्ष होगी कार्रवाई !

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चाल्हा/कापू – ग्राम पंचायत चाल्हा में वन भूमि से जुड़े 8 वन अधिकार पट्टों की वैधता को लेकर विवाद सामने आया है। ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव एवं ग्रामीणों की शिकायत पर एसडीएम राजस्व न्यायालय में पहुंचे इस प्रकरण में शिकायतकर्ताओं की ओर से संबंधित पट्टों को फर्जी बताए जाने संबंधी आरोप लगाए गए थे। सुनवाई के बाद न्यायालय ने पट्टों के निरस्तीकरण को अपने क्षेत्राधिकार से बाहर माना और स्पष्ट किया कि वन अधिकार-पत्रों के संबंध में निरस्तीकरण की कार्रवाई निर्धारित त्रि-स्तरीय वन अधिकार समिति की प्रक्रिया के तहत ही की जानी है।


राजस्व कोर्ट ने नहीं दिया पट्टों की वैधता पर अंतिम फैसला
इस मामले में महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एसडीएम न्यायालय ने 8 वन अधिकार पट्टों को स्वयं निरस्त नहीं किया है। यानी न्यायालय के आदेश को इन पट्टों की वैधता पर अंतिम न्यायिक निर्णय के रूप में नहीं देखा जा सकता। पट्टों की वैधता और निरस्तीकरण से संबंधित आगे की कार्रवाई सक्षम वन अधिकार समिति के स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होगी।


ग्राम सभा से जिला स्तर तक तय है प्रक्रिया
वन अधिकार से संबंधित दावों और अधिकार-पत्रों के मामलों में ग्राम सभा, उपखंड स्तरीय समिति और जिला स्तरीय समिति की भूमिका निर्धारित है। एसडीएम न्यायालय के आदेश के बाद अब संबंधित शिकायतकर्ताओं को इसी प्रक्रिया के तहत अपने दावे और उपलब्ध दस्तावेज सक्षम समिति के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। समिति के स्तर पर अभिलेखों और दावों की जांच के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
8 पट्टों ने बढ़ाई प्रशासनिक गंभीरता
एक ही ग्राम पंचायत क्षेत्र में 8 वन अधिकार पट्टों को लेकर शिकायत सामने आने से मामला प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो गया है। शिकायत में जिन पट्टों को फर्जी बताया गया है, उनकी वास्तविक स्थिति संबंधित अभिलेखों, दावों और निर्धारित प्रक्रिया में होने वाली जांच से ही स्पष्ट होगी। एसडीएम न्यायालय द्वारा प्रकरण नस्तीबद्ध किए जाने के बाद अब निगाहें त्रि-स्तरीय वन अधिकार समिति की आगामी कार्रवाई पर टिक गई हैं।
फिलहाल न्यायालय का आदेश पट्टों को वैध घोषित करने वाला आदेश भी नहीं है और उन्हें निरस्त करने वाला आदेश भी नहीं। आदेश का मुख्य आधार राजस्व न्यायालय का क्षेत्राधिकार है, जबकि पट्टों की वैधता पर आगे की कार्रवाई के लिए सक्षम वन अधिकार समिति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

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