जंगल में फंसी लकड़ियों से भरी गाड़ी, फिर पहुंचे वन अधिकारी!
1 min read

भारी मात्रा में आम और महुआ लकड़ी से लदा माजदा वाहन जब्त

धरमजयगढ़/छाल: रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल रेंज अंतर्गत आने वाले औरानारा जंगल से अवैध रूप से कीमती लकड़ियों के संदिग्ध परिवहन का एक बड़ा मामला सामने आया है। औरानारा जंगल के कम्पार्टमेंट नंबर 525 से अवैध रूप से आम और महुआ की हरी-भरी लकड़ियों को लोड कर जा रहा माजदा कंपनी का एक वाहन विपरीत परिस्थितियों के कारण जंगल के भीतर ही फंस गया। गाड़ी में आए तकनीकी खराबी (ब्रेकडाउन) की वजह से तस्कर वाहन को समय रहते बाहर नहीं निकाल सके, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर वाहन सहित पूरी लकड़ी को जब्त कर लिया है।

घंटों फंसे रहने के बाद पहुँची वन विभाग की टीम !
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अवैध लकड़ी से लदा यह वाहन जंगल के भीतर घंटों तक फंसा रहा। जब काफी कोशिशों के बाद भी वाहन वहां से नहीं निकल सका, तब वन विभाग के कर्मचारियों को इसकी भनक लगी। वन अमले ने मौके पर पहुंचकर जब छानबीन की, तो वाहन में भारी मात्रा में कथित तौर पर अवैध रूप से काटी गई आम और महुआ की लकड़ियां लोड पाई गईं। वन विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि सूचना मिलते ही उन्होंने मौके पर आकर तत्काल वैधानिक कार्यवाही शुरू कर दी।

पीओआर (POR) दर्ज, गाड़ी राजसात करने की तैयारी!
इस बड़ी लापरवाही और तस्करी के मामले में वन विभाग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पकड़े गए वाहन के चालक और सह-चालक के बयानों के आधार पर वन विभाग द्वारा प्राइमरी ऑफेंस रिपोर्ट (POR) दर्ज कर ली गई है। इसके साथ ही, स्थानीय ग्रामीणों की मौजूदगी में गवाह पंचनामा भी तैयार कर लिया गया है। वन विभाग अब इस तस्करी में इस्तेमाल किए गए माजदा वाहन को राजसात (सरकारी संपत्ति घोषित) करने की कानूनी तैयारी में जुट गया है।
रसूखदार ने अधिकारी को ही सिखाया ‘कानून’ !
संबंधित क्षेत्र के सहायक परिक्षेत्र अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, जब्त की गई लकड़ी छाल के ही एक रसूखदार शख्स विजय अग्रवाल की बताई जा रही है। मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब वन विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में संबंधित रसूखदार विजय से पूछताछ की। अधिकारियों को सहयोग करने और स्पष्टीकरण देने के बजाय, विजय अग्रवाल ने खुद को कानून का जानकार बताते हुए सहायक परिक्षेत्र अधिकारी पर ही धौंस जमाने की कोशिश की। रसूखदार व्यक्ति ने कथित तौर पर विवादित बयान देते हुए कहा कि “आम और महुआ की लकड़ी के परिवहन के लिए किसी भी प्रकार की परिवहन स्वीकृति (टीपी) की जरूरत नहीं होती है।”

आगे की विभागीय जांच जारी
अधिकारी को ही कानून का पाठ पढ़ाने वाले स्थानीय रसूखदार के इस दावे के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। हालांकि, वन विभाग नियमों के तहत सख्त कार्यवाही की बात कह रहा है। चालक-परिचालक से पूछताछ और कागजी दस्तावेजों की जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इन हरे पेड़ों को जंगल के किस हिस्से से काटा गया था और इन्हें कहां खपाने की तैयारी थी।
“जब्त लकड़ियों की वैधता की जांच की जा रही है। प्रकरण में वास्तविक तथ्यों के आधार पर विधिवत कार्यवाही की जाएगी।”
आर. के. चौहान – रेंजर, छाल रेंज
Subscribe to my channel