April 13, 2026

Udghosh Samay News

खबर जहां हम वहां

डॉ.अशोक कुमार भौमिक की दृष्टि में ए.के.एस.विश्वविद्यालय की मत्स्य पालन इकाई: शिक्षा से आत्मनिर्भरता तक का सेतु

1 min read
Spread the love

सतना। “मत्स्य पालन आज केवल एक सहायक व्यवसाय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है।” यह कहना है ए.के.एस. विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के अधिष्ठाता (डीन) डॉ. अशोक कुमार भौमिक का। उनके अनुसार, विश्वविद्यालय में संचालित मत्स्य पालन इकाई शिक्षा, अनुसंधान और रोजगार—तीनों के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

डॉ. भौमिक बताते हैं कि पिछले लगभग पांच वर्षों से संचालित यह इकाई अब एक प्रायोगिक प्रशिक्षण केंद्र (लाइव डेमोंस्ट्रेशन यूनिट) के रूप में विकसित हो चुकी है, जहां छात्र केवल किताबों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में सीखते हैं। “हमारा उद्देश्य छात्रों को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है,” वे स्पष्ट करते हैं।विश्वविद्यालय की इस इकाई में पॉलीकल्चर तकनीक के माध्यम से रोहू, कतला और मृगेल जैसी प्रजातियों का संतुलित पालन किया जा रहा है। डॉ. भौमिक के अनुसार, “यह पद्धति प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करती है,

जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन संभव होता है।”वे बताते हैं कि इकाई में वैज्ञानिक पद्धतियों को विशेष महत्व दिया गया है। इसमेंजल गुणवत्ता प्रबंधन (Water Quality Management),एरेशन तकनीक द्वारा ऑक्सीजन संतुलन,संतुलित एवं पौष्टिक आहार प्रबंधन,और उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज का चयनजैसी तकनीकों का नियमित उपयोग किया जा रहा है। “इन्हीं कारणों से हमारी उत्पादन क्षमता निरंतर बेहतर हो रही है,” वे जोड़ते हैं।लगभग 85 फीट लंबाई और 78 फीट चौड़ाई में फैली इस इकाई से प्रतिवर्ष 4.5 से 5 क्विंटल तक मछली उत्पादन हो रहा है। लेकिन डॉ. भौमिक के अनुसार, “इससे भी अधिक महत्वपूर्ण इसका प्रशिक्षण प्रभाव है।” अब तक लगभग 500 छात्र-छात्राओं और आसपास के किसानों को यहां प्रशिक्षण दिया जा चुका है।वे विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं पर इसके प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहते हैं, “आज के समय में कम लागत में अधिक लाभ देने वाले व्यवसायों की जरूरत है। मत्स्य पालन ऐसा ही एक क्षेत्र है, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है। यदि इसे वैज्ञानिक ढंग से किया जाए, तो यह स्वरोजगार का मजबूत आधार बन सकता है।”डॉ. भौमिक के अनुसार, विश्वविद्यालय भविष्य में इस इकाई का विस्तार कर इसे एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) से जोड़ने की योजना बना रहा है, जिसमें मत्स्य पालन के साथ सब्जी उत्पादन और पशुपालन को भी जोड़ा जाएगा, ताकि किसानों को बहुआयामी लाभ मिल सके।उनका मानना है कि “ए.के.एस. विश्वविद्यालय की यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है, जहां शिक्षा सीधे रोजगार और उद्यमिता से जुड़ रही है।”

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[join_button]
WhatsApp