आवंटन निरस्त, फिर भी चलता रहा क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण ? करोड़ों खर्च पर वास्तविकता को लेकर संशय !
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धरमजयगढ़, – दुर्गापुर ll सरिया कोल ब्लॉक को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से जारी पत्र में कर्नाटक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अनुरोध पर आगे की प्रक्रिया बढ़ाए जाने का उल्लेख है, जिसमें क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए वन भूमि उपलब्ध कराने की बात कही गई है। प्रस्तावित 290.399 हेक्टेयर वन भूमि के बदले लगभग 580.800 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण की योजना सामने आई है। इसके लिए मरवाही, धरमजयगढ़ और सुकमा वनमंडलों में भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच धरमजयगढ़ क्षेत्र का पुराना प्रकरण भी फिर चर्चा में आ गया है, जहां पूर्व में इसी कोल ब्लॉक से जुड़े मामले में वन भूमि प्रदान की गई थी और उसके बदले विभिन्न स्थानों जिनमे छाल वन परिक्षेत्र के लोटान, लामीखार, बेहरामुड़ा, पुसलदा , एडुकला और धरमजयगढ़ परिक्षेत्र के नागदरहा में वृक्षारोपण दर्शाया गया था। उस समय करोड़ों रुपये की राशि भी जमा कराए जाने का उल्लेख अभिलेखों में मिलता है, लेकिन जमीनी स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ पाई है !

उपलब्ध अभिलेख बताते हैं कि जब फिर से क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए बड़े पैमाने पर भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया शुरू हो रही है, तो यह जिज्ञासा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि क्या यह प्रस्ताव उन्हीं स्थानों से जुड़ा है जहां पहले वृक्षारोपण दिखाया गया था। विशेष रूप से धरमजयगढ़ के छाल और धरमजयगढ़ परिक्षेत्र में पूर्व में जिन स्थलों पर वृक्षारोपण दर्शाया गया, क्या वही क्षेत्र फिर से प्रस्ताव में शामिल हैं, इस पर स्थिति अभी भी संशयपूर्ण बनी हुईं है
यदि ऐसा पाया जाता है कि पूर्व में दर्शाए गए स्थलों को ही पुनः प्रस्तावित किया जा रहा है, तो इससे पूरे प्रकरण की प्रकृति और भी गंभीर हो सकती है। वहीं यदि नए क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं, तो पुराने कार्यों की वास्तविक स्थिति और भी जांच का विषय बन जाती है।
आने वाले समय में यह खुलासा महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित वृक्षारोपण के लिए चिन्हित भूमि और पूर्व में दर्शाए गए स्थलों के बीच क्या संबंध है।
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